पवन खेड़ा ने शनिवार को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का एक वीडियो शेयर करते हुए एक्स पर पोस्ट कर कहा, हम सभी को पढ़ाई के दौरान ग्रुप प्रोजेक्ट में एक ऐसा क्लासमेट याद होगा, जो कोई काम नहीं करता, लेकिन आकर सारा श्रेय खुद ले लेता है। नरेंद्र मोदी भी कुछ ऐसे ही हैं।
- खेड़ा ने दावा किया कि 2012–13 में नंदन नीलेकानी के नेतृत्व में UPI की अवधारणा सामने आई थी। जो उस समय भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण के अध्यक्ष थे।
- दिसंबर 2013 में यूपीए सरकार द्वारा नियुक्त समिति ने मोबाइल आधारित डिजिटल पेमेंट्स इंफ्रास्ट्रक्चर की सिफारिश की थी।
- उन्होंने यह भी कहा कि 2010 में नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) द्वारा विकसित इमीडिएट पेमेंट सर्विस (IMPS) ने तकनीकी आधार तैयार किया।
- NPCI ने 2013-2014 में उस मूल आर्किटेक्चर को डिजाइन करना शुरू किया जो बाद में यूपीआई बन गया।
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने आरोप लगाते हुए कहा, पीएम मोदी केवल उद्घाटन और घोषणाओं के जरिए परियोजनाओं का श्रेय लेते हैं।
किसने की भारत की तारीफ?
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने गुरुवार को इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में मुंबई के एक स्ट्रीट वेंडर का जिक्र कर भारत के डिजिटल बदलाव के बारे में सबको बताया। उन्होंने बताया कि जो व्यक्ति एक दशक पहले बैंक अकाउंट नहीं खोल पाता था, वह अब आसानी से ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम का इस्तेमाल करता है।
उन्होंने कहा, “मैं एक कहानी से शुरू करना चाहता हूं। दस साल पहले, मुंबई में एक रेहड़ी वाला बैंक अकाउंट नहीं खोल सकता था, कोई पता नहीं, कोई कागजात नहीं, कोई एक्सेस नहीं। आज, वही वेंडर देश में किसी से भी अपने फोन पर तुरंत और मुफ्त में पेमेंट लेता है। यह सिर्फ एक टेक कहानी नहीं है। यह एक सिविलाइजेशन की कहानी है।”
भारत ने वो किया, जो दुनिया के किसी देश ने नहीं किया
इमैनुएल मैक्रों ने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के स्केल पर जोर देते हुए कहा, “भारत ने कुछ ऐसा बनाया है जो दुनिया के किसी और देश ने नहीं बनाया है। 140 करोड़ लोगों के लिए एक डिजिटल पहचान। एक पेमेंट सिस्टम जो अब हर महीने 20 बिलियन ट्रांजैक्शन प्रोसेस करता है और एक हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर जिसने 500 मिलियन डिजिटल हेल्थ आईडी जारी किए हैं।”













