श्रुति हासन ने तेलुगु, तमिल और हिंदी फिल्मों में काम किया है। ‘सालार: पार्ट 1 – सीजफायर’ (2023), ‘गब्बर सिंह’ (2012), ‘रेस गुर्रम’ (2014), ‘श्रीमान्थुडु’ (2015) और तमिल फिल्म ‘3’ (2012) में वह नजर आ चुकी हैं। वह ‘रमैया वस्तावैया’ में भी लीड रोल में दिखी थीं। उनके पिता कमल हासन, माता सारिका ठाकुर और छोटी बहन अक्षरा हासन हैं।
श्रुति हासन की मां तो था डर
रणवीर अल्लाहबादिया से बातचीत में श्रुति हासन ने बताया था कि वह तमिल और हिंदी भाषा के इर्द-गिर्द पली-बढ़ी हैं। उन्होंने अपने पेरेट्स की विरासत को आगे बढ़ाने के दबाव पर कहा था, ‘अब जैसे कि मेरी परवरिश ऐसे ही हुई है तो मां का असर मुझ पर ज्यादा है। घर पर हम सिर्फ हिंदी और इंग्लिश में ही बात करते थे। तो इससे मम्मी को डर रहता था कि ये हिंदी नहीं सीख पाएंगे क्योंकि हम सिर्फ तमिल में ही बात करते थे। इसी वजह से कई सालों तक हमारी तमिल पर इसका बुरा प्रभाव पड़ा।’
कमल-सारिका कभी स्कूल नहीं गए
श्रुति ने बताया, ‘मैं इंग्लिश मीडियम स्कूल जाती थी। इसलिए लंबे समय तक मेरी तमिल कमजोर थी। और अभी भी है।’ एक्ट्रेस ने बताया कि जब उनके माता-पिता अलग हुए थे, तब वह मुंबई आई थीं। इस दौरान उन्होंने ये भी बताया कि उनके पेरेंट्स कभी स्कूल नहीं गए तो उनका बचपन बाकी बच्चों की तरह नॉर्मल नहीं था। ‘मेरा बचपन सामान्य नहीं था। हम फिल्म के सेट पर बड़े हुए हैं। पांच साल की थी, जब देखती थी कि हाथी और कुत्ते हमारे पास आकर खड़े हो जाते थे। ये सब बहुत ही कमाल का था। कई फेमस एक्टर्स से मिले थे। कई अच्छी जगह जाने का मौका भी मिलता था। मेरे माता-पिता स्कूल तो गए नहीं कभी, इसलिए उन्हें पता ही नहीं कि बच्चों की पढ़ाई कैसे कराई जाती है।’
श्रुति हासन के घर में भगवान नहीं
एक्टर्स ने अपने घर के बारे में बताया कि उनका परिवार धर्म और भगवान को नहीं मानता। ‘हम नास्तिक, गैर-धार्मिक परिवार में बड़े हुए हैं। जब मैं ऐसा कहती हूं तो पापा को अच्छा नहीं लगता। हमारे घर पर भगवान नहीं थे और न ही ये जरूरी था हमें मंगलवार को नॉन-वेज खाना नहीं खाना है। इस तरह का कुछ भी हमारे घर नहीं होता था। धर्म और भगवान का कॉन्सेप्ट तो हमारे लिए था ही नहीं। इसलिए शायद बचपन से मेरे मन में ये बात बैठ गई कि कला ही भगवान है।’
कमल हासन को नहीं पसंद टैटू और ज्योतिष
श्रुति ने बताया, ‘अगर आप पापा से एस्ट्रोलॉजी के बारे में बात करेंगे तो वो बोलेंगे भाग जाओ। वह बहुत क्रिएटिव और प्रैक्टिकल हैं। मुझे ऐसा लगता है कि पापा भगवान के बच्चे हैं। उनको टैटू तक नहीं पसंद। उससे नफरत करते हैं।’ उन्होंने आगे कहा कि वह विक्का (प्रकृति के देवी-देवताओं की पूजा) में यकीन करती हैं। ‘हमारी जो पूर्वज थीं, वो महिलाएं थीं। इसलिए मैं विक्का और मूर्तिपूजा मे भरोसा करती हूं। हम चुड़ैलों की पोतियां हैं, जिनको जलाया नहीं जा सका। मुझे महसूस होता है कि मेरी रगों में उनका खून है।’













