ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेन्स-फ्रेडरिक नीलसन और चार पार्टी नेताओं की ओर से शुक्रवार रात जारी एक एक बयान में कहा गया है, ‘हम अमेरिकी नहीं बनना चाहते और ना ही हम डेनिश नहीं बनना चाहते हैं। हम ग्रीनलैंडवासी बनना चाहते हैं और हमें यही रहने दिया जाए। ग्रीनलैंड का भविष्य ग्रीनलैंड के लोग ही तय करेंगे।’
हम पर दबाव ना बनाया जाए
बयान में कहा गया है, ‘ग्रीनलैंड के पार्टी नेताओं के तौर पर हम एक बार फिर इस बात पर जोर देना चाहते हैं कि हमारे देश के प्रति अमेरिका की नफरत खत्म होनी चाहिए। ग्रीनलैंड के भविष्य पर काम ग्रीनलैंड के लोगों के साथ बातचीत में होता है और इसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों के आधार पर ही तैयार किया जाता है।’
बयान में आगे कहा गया है कि ग्रीनलैंड में कोई दूसरा देश इसमें दखल नहीं दे सकता है। हमें अपने देश का भविष्य खुद तय करना होगा। यह बिना किसी दबाव, जल्दीबादी, देरी या दूसरे देशों के दखल के बिना होगा। इस बयान पर नीलसन, पेले ब्रोबर्ग, म्यूटे बी एगेडे, एलेका हैमंड और अक्कालु सी जेरिमिसेन ने साइन किए हैं।
ग्रीनलैंड की खासियत
ग्रीनलैंड दुनिया का एक बेहद अहम द्वीप है। इसकी आबादी करीब 57,000 है। ग्रीनलैंड का अपना पीएम बनता है लेकिन इसकी अपनी कोई सेना नहीं है। ग्रीनलैंड की सुरक्षा डेनमार्क की सेना देखती है। अमेरिका की ओर से कहा जा रहा है कि वह किसी भी सूरत में ग्रीनलैंड को अपने कब्जे में लेना चाहता है। अमेरिका के ट्रंप प्रशासन की ओर से आ रहे इन बयानों ने डेनमार्क और ग्रीनलैंड की चिंता को बढ़ाया है।












