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  • हम पागल हैं जो दूसरा पाकिस्तान बन जाने दें…50 साल बाद तुर्कमान गेट के पास फिर गरजे बुलडोजर

    नई दिल्ली: करीब 50 साल पहले की बात है, जब देश में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आपातकाल लगा दिया था। इसी दौरान फरवरी, 1976 में किसी वक्त इंदिरा गांधी के छोटे बेटे संजय गांधी पुरानी दिल्ली घूमने गए थे। उन्होंने देखा कि तुर्कमान गेट के आसपास इतनी झुग्गियां और पुरानी हमारतें थीं कि जामिया


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    By Azad Hind Desk जनवरी 7, 2026
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    नई दिल्ली: करीब 50 साल पहले की बात है, जब देश में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आपातकाल लगा दिया था। इसी दौरान फरवरी, 1976 में किसी वक्त इंदिरा गांधी के छोटे बेटे संजय गांधी पुरानी दिल्ली घूमने गए थे। उन्होंने देखा कि तुर्कमान गेट के आसपास इतनी झुग्गियां और पुरानी हमारतें थीं कि जामिया मस्जिद ठीक से दिखाई नहीं दे रही थी। उसी वक्त संजय गांधी यह फैसला किया कि सारी अवैध इमारतें और निर्माण गिरा दिए जाएंगे। करीब 50 साल बाद फिर 6 जनवरी की रात को नरेंद्र मोदी सरकार के दौर में इसी तुर्कमान गेट पर दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर बुलडोजर एक्शन हुआ है, जिसमें अवैध अतिक्रमण हटाया जा रहा है। ये इलाके मुस्लिम बहुल इलाके हैं, जहां फैज-ए-इलाही मस्जिद मौजूद है।

    संजय गांधी ने भरोसेमंद जगमोहन को सौंपा जिम्मा

    बीबीसी की रिपोर्ट में कहा गया है कि संजय गांधी की इस इच्छा को पूरी करने के लिए लालकिले, जामा मस्जिद और तुर्कमान गेट के आसपास के इलाकों की पहचान की गई और जिम्मा सौंपा गया एक मजबूत इरादों वाले और संजय गांधी के भरोसेमंद जगमोहन को, जो उस वक्त दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के वाइसचेयरमैन भी थे।

    इंदिरा से बताई थी संजय गांधी ने अपनी इच्छा

    बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, इंदिरा गांधी की जीवनी लिखने वाली लेखिका कैथरीन फ्रैंक ने कहा है कि संजय ने इंदिरा गांधी से इच्छा जताई कि वो चाहते हैं कि उन्हें तुर्कमान गेट से जामा मस्जिद साफ-साफ दिखाई दे। इंदिरा गांधी ने इस बात से मना नहीं किया। इसके बाद जगमोहन ने संजय गांधी के इन मौखिक शब्दों को आदेश की तरह लिया।

    जगमोहन के आदेश पर गरजे बुलडोजर

    बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल 1976 को पहला बुलडोजर तुर्कमान गेट पहुंचा। जगमोहन के आदेश पर आसफ अली रोड पर पुरानी इमारतें गिरानी शुरू हुईं। तुर्कमान गेट के आसपास के कलां महल, दूजाना हाउस और आसपास की झुग्गियों को जमींदोज कर दिया गया। वहां के निवासियों को दूर-दराज के पुनर्वास कॉलोनियों में शिफ्ट कर दिया गया। आपातकाल 25 जून, 1975 से 21 मार्च, 1977 (लगभग 21 महीने) तक था।

    तुर्कमान गेट के आड़े आने वाली हर चीज मिटा दी

    बीबीसी के अनुसार, जगमोहन ने तुर्कमान गेट से जामा मस्जिद के बीच आने वाली हर चीज मिटा दी गई, जो आड़े आ रही थी। यहां रहने वाले हजारों लोगों को बीस मील दूर यमुना पार खाली पड़ी जमीन पर बसाया गया। उस समय 16 बुलडोजर दिन-रात काम कर रहे थे। उसी दिन तुर्कमान गेट के लोगों का एक प्रतिनिधिमंडल जगमोहन से मिलने गया।

    हम पागल हैं, जो एक पाकिस्तान तोड़कर दूसरा बनने दें

    प्रतिनिधिमंडल ने अनुरोध किया कि उन्हें तुर्कमान गेट से दूर न भेजा जाए और अलग अलग जगहों पर न भेज कर एक साथ रहने दिया जाए। इस पर जगमोहन ने कहा-क्या आप समझते हैं कि हम पागल हैं कि एक पाकिस्तान तोड़ कर दूसरा पाकिस्तान बन जाने दें? हम आपको त्रिलोकपुरी और खिचड़ीपुर में प्लॉट देंगे और आपको उन पांच लाख लोगों की तरह वहां जाना पड़ेगा जिन्हें हम वहां बसाना चाहते हैं। ये याद रखिए अगर आप वहां नहीं जाते हैं और डिमोलिशन का विरोध करने की बेवकूफी जारी रखते हैं, तो इसके नतीजे गंभीर होंगे।

    फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास धरने पर बैठे लोग

    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तुर्कमान गेट पर बुलडोजर एक्शन के दौरान पुलिस ने हवाई फायरिंग भी की। विरोध-प्रदर्शन के दौरान फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास करीब 5 हजार लोग धरने पर बैठ गए। लाठीचार्ज हुआ, आंसू गैस छोड़ी गई, मगर विरोध नहीं रुका तो पुलिस ने हवाई फायरिंग की। चूंकि आपातकाल लगा था, ऐसे में मीडिया में इसकी रिपोर्टिंग भी नहीं हुई। हजारों लोग विस्थापित हुए।

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