यह सीयूएएस ग्रिड, इंटीग्रेटेड एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम (आईएसीसीएस) जैसे वर्तमान में मौजूद हवाई रक्षा नेटवर्क से बिल्कुल अलग तरह से काम करेगा। अधिकारियों के मुताबिक पारंपरिक हवाई खतरों के साथ-साथ छोटे ड्रोनों पर नजर रखने का काम आईएसीसीएस पर डालने से नेटवर्क पर अत्यधिक बोझ पड़ जाएगा।
इसके बजाय, नया ग्रिड, सेना, नौसेना और वायु सेना के संयुक्त हवाई रक्षा केंद्रों (जेएडीसीएस) से जुड़ा होगा और एक स्थायी डेडिकेडेट ड्रोन-रोधी नेटवर्क के रूप में कार्य करेगा।
ड्रोन राधी सिस्टम को एक साथ एकीकृत करेगा
अधिकारियों ने इस ग्रिड को लेकर जानकारी देते हुए कहा कि यह ग्रिड पिछले 5 से 6 वर्षों में सेना की तीनों सेवाओं के पास मौजूद ड्रोन-रोधी प्रणालियों को एकीकृत करेगा, जिससे वास्तविक समय की निगरानी और कम ऊंचाई वाले और मानवरहित हवाई खतरों पर तुरंत प्रतिक्रिया संभव हो सकेगी।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद एयर डिफेंस सिस्टम को और मजबूत करने में जुटा भारत
बता दें कि पाकिस्तान की सेना ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तुर्की और चीनी ड्रोन से भारत के नागरिक और सैन्य ठिकानों पर हमला करने की कोशिश की थी। लेकिन भारतीय सेना की एयर डिफेंस यूनिट्स ने इन हमलों को हर बार नाकाम कर दिया। खास तौर पर, L-70 और ZU-23 गन्स ने छोटे ड्रोन्स को भारी नुकसान पहुंचाया।
राजनाथ सिंह ने एयर डिफेंस सिस्टम को लेकर कही थी बड़ी बात
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ के मुख्यालय के 68वें स्थापना दिवस के अवसर पर हाल ही में अपने दौरे के दौरान कहा कि इस पहल को लागू करने में डीआरडीओ एक अहम भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा था कि डीआरडीओ को अगले दशक में हवाई सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों को वायु रक्षा प्रणालियों से लैस करने का कार्य सौंपा गया है। डीआरडीओ आने वाले साल में भारत के एयर डिफेंस सिस्टम को और मजबूत करेगा।














