सुनील शेट्टी ने ANI से कहा, ‘मैं बहुत कम उम्र में ही यहां से चला गया था। कुछ और बनने के लिए नहीं, ना ही कोई और व्यक्ति बनने के लिए। ये कदम अवसर की वजह से था, ना कि पहचान को नए सिरे से गढ़ने की इच्छा से। मुंबई में अपना करियर बनाने के बावजूद उनकी आत्म-पहचान बदली नहीं है।
‘मुझे भाषा बोलने के लिए मजबूर मत करो’
मैसूर के रहने वाले सुनील शेट्टी ने कहा, ‘मैं जो कुछ भी करता हूं, उसमें मंगलुरु की झलक मिलती है।’ वो आगे कहते हैं, ‘जब कोई पूछता है, मराठी का क्या? तो मैं कहता हूं, मराठी का क्या?’ उन्होंने ये सवाल उठाते हुए कहा कि भाषा को अक्सर किसी की पहचान का जरूरी प्रतीक क्यों मान लिया जाता है! वे किसी भी तरह के दबाव का विरोध करते हुए कहते हैं, ‘नहीं, आपको मराठी बोलनी ही है। मैंने कहा, मुझे ऐसा करने की कोई बाध्यता नहीं है। मैं जब चाहूंगा, तब बोलूंगा। मुझे भाषा बोलने के लिए मजबूर मत करो।’
‘महाराष्ट्रीयन बच्चों से बेहतर मराठी बोलता हूं’
मुंबई को अपनी कर्मभूमि मानते हुए उन्होंने समझाया कि वे मराठी सीखना क्यों जरूरी समझते हैं! उन्होंने कहा, ‘अगर ये मेरी कर्मभूमि है तो अगर मैं भाषा सीखता हूं तो मैं बहुत से लोगों को खुश रखूंगा। मैं शायद आज मुंबई में रहने वाले ज्यादातर महाराष्ट्रीयन बच्चों से बेहतर मराठी बोलता हूं।’
सुनील शेट्टी की अपकमिंग मूवी
1992 में ‘बलवान’ फिल्म से एक्टिंग की दुनिया में कदम रखने वाले सुनील को 2025 में ‘केसरी वीर’ के बाद अब ‘वेलकम टू द जंगल’ में देखा जाएगा। ये फिल्म इस साल रिलीज होने के लिए तैयार है। ये क्रिसमस पर दस्तक देगी।














