दूसरे विश्व युद्ध के दौरान एडोल्फ हिटलर ने ब्रिटेन को हराने के लिए बंदूकों और बमों के साथ ही पैसों को भी युद्ध में शामिल करने की योजना बनाई थी। प्रसिद्ध आयरिश अर्थशास्त्री और लेखक डेविड मैकविलियम्स ने अपनी किताब ‘ Money : A Story of Humanity ‘ में इस कहानी को बताया है। हिटलर का यह खयाल रूस के क्रांतिकारी नेता व्लादिमीर लेनिन से मिलता था। लेनिन ने 1919 में एक इंटरव्यू में कहा था कि किसी समाज को कमजोर करने का सबसे आसान तरीका है उसकी करंसी को खराब कर देना। रूसी नेता का मानना था कि जानबूझकर ज्यादा नोट छापकर पैसे की वैल्यू खत्म कर दो, ताकि पूंजीवादी सिस्टम ढह जाए।
पहले विश्व युद्ध की सीख
हिटलर ने पहले विश्व युद्ध के बाद जर्मनी में आई महंगाई को नजदीक से देखा था। उस जमाने में जर्मन मुद्रा इतनी कमजोर हो गई थी कि लोग नोटों से चूल्हा जलाने लगे थे। कुछ खरीदने के लिए बोरों में भरकर पैसे देने पड़ते। एक रोटी की कीमत अरबों में हो गई थी। इससे हिटलर यह सीख गया कि अगर किसी देश की मुद्रा से भरोसा खत्म हो जाए, तो पूरा समाज बिखर सकता है।
नकली नोटों का विचार
दूसरे विश्व युद्ध में ब्रिटेन को हराने के लिए हिटलर को नकली करंसी छापने का विचार आया। उसने सोचा कि अगर ब्रिटेन में बड़ी संख्या में नकली पाउंड फैला दिए जाएं तो वहां महंगाई बेकाबू हो जाएगी, लोगों का भरोसा सरकार और बैंकिंग प्रणाली से खत्म हो जाएगा और देश भीतर से खोखला हो जाएगा। इसके बाद जर्मनी ने शुरू किया ऑपरेशन बर्नहार्ड। हिटलर ने इसमें नाजी पार्टी के अपने विश्वस्त लोगों को लगाया।
बर्लिन में अड्डा
इसके लिए जर्मनी की राजधानी बर्लिन के एक यातना शिविर में गुप्त छापाखाना लगाया गया। वहां दुनिया के उत्कृष्ट जालसाज, प्रिंटर, कलाकार और कागज के विशेषज्ञ रखे गए। इनमें से कई यहूदी कैदी थी, जिन्हें यातना शिविर से ही चुना गया था। उनसे नकली ब्रिटिश पाउंड बनवाए गए। नाजी कैदखानों में बंदियों के साथ अमानवीय बर्ताव किया जाता था, लेकिन जो कैदी हिटलर की साजिश का हिस्सा बने, उन्हें बहुत रियायत मिली। उनके साथ शिविर के अन्य हिस्सों के मुकाबले अच्छा सलूक होता। उन्हें बेहतर राशन मिलता था। यहां तक कि उन्हें सिगरेट, अखबार और समाचार सुनने के लिए रेडियो, मनोरंजन के लिए पिंग-पोंग टेबल और ठंड से बचने के लिए ज्यादा कंबल भी दिए जाते।
सफल नहीं हुई योजना
ऑपरेशन बर्नहार्ड के तहत करीब 17.5 अरब के नकली पाउंड छाप लिए गए। इन नोटों की क्वॉलिटी इतनी अच्छी थी कि इनको देखकर नकली बताना मुश्किल था। बाद में उन नोटों को देखकर बैंक ऑफ इंग्लैंड भी चकित हो गया था। नाजियों की रणनीति इन नकली नोट ों को हवाई जहाज से ब्रिटेन के शहरों पर गिराने की थी, ताकि लोगों को लगे कि आसमान से पैसा बरस रहा है। लेकिन, जब तक ये नकली नोट तैयार हुए, जर्मनी युद्ध में कमजोर पड़ चुका था। उसकी हवाई ताकत कमजोर हो गई थी और इस वजह से योजना पूरी नहीं हो सकी।













