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  • ‘हेडगेवार खिलाफत मूवमेंट में जेल गए थे’: आजादी के आंदोलन में RSS की भूमिका पर बोले ओवैसी

    नई दिल्ली: एआईएमआईएम चीफ और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने आजादी की लड़ाई में आरएसएस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए दावा किया है कि संघ के संस्थापक डॉ केशव बलिराम हेडगेवार अंग्रेजी हुकूमत के विरोध में नहीं, बल्कि खिलाफत आंदोलन के समर्थन में जेल गए थे। जबकि, खिलाफत आंदोलन शुद्ध रूप से मुसलमानों


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    By Azad Hind Desk जनवरी 13, 2026
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    नई दिल्ली: एआईएमआईएम चीफ और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने आजादी की लड़ाई में आरएसएस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए दावा किया है कि संघ के संस्थापक डॉ केशव बलिराम हेडगेवार अंग्रेजी हुकूमत के विरोध में नहीं, बल्कि खिलाफत आंदोलन के समर्थन में जेल गए थे। जबकि, खिलाफत आंदोलन शुद्ध रूप से मुसलमानों का एक धार्मिक आंदोलन था और इसके समर्थन के लिए असहयोग आंदोलन को लेकर भी विवाद रहा है।

    ‘आरएसएस का कोई नेता जेल गया?’

    महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में निगम चुनावों से पहले एक रैली में असुदुद्दीन ओवैसी ने बीजेपी पर कथित रूप से हिंदुत्व का एजेंडा आगे बढ़ाने का आरोप लगाते हुए आरएसएस को लेकर सवाल उठाया कि उसकी आजादी के आंदोलन में कोई भूमिका नहीं रही। उन्होंने सवाल किया कि,’क्या आरएसएस का कोई नेता है, जो अंग्रेजों के खिलाफ लड़ते हुए जेल गया हो?’

    ‘खिलाफत मूवमेंट के समर्थन में जेल गए’

    एआईएमआईएम चीफ ने आगे कहा, ‘वे (आरएसएस) दावा करते हैं कि हेडगेवार जेल में थे, लेकिन वो खिलाफत मूवमेंट के समर्थन में जेल गए थे। आज वे मुसलमानों के खिलाफ नफरत फैलाते हैं।’ उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आरएसएस देशभक्ति के बारे में बोलता है, लेकिन ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ लड़ते हुए इसने एक भी सदस्य नहीं गंवाया। ओवैसी ने मुंबई के समाजवादी नेता यूसुफ मेहरअली का हवाला दिया कि वे ‘भारत छोड़ो’ और ‘साइमन गो बैक’ जैसे नारे गढ़ने के लिए जाने जाते हैं। उनका कहना है कि आरएसएस को खुद इतिहास नहीं पता और दूसरों को गलत तरीके से बांग्लादेशी बताता है।

    खिलाफत आंदोलन क्या था

    1919 से 1924 की दौर में चला खिलाफत आंदोलन पूरी तरह से मुसलमानों का एक धार्मिक आंदोलन था और इसका भारत से कोई सीधा लेना-देना भी नहीं था। इसका मकसद प्रथम विश्व युद्ध के बाद ब्रिटिश सरकार पर दबाव डालकर इस्लाम के खलीफा (तुर्की के आध्यात्मिक नेता) के तौर पर ऑटोमन सुल्तान की सत्ता को बनाए रखना था। यही वजह है कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान जब असहयोग आंदोलन शुरू हुआ तो उसमें खिलाफत आंदोलन को भी समर्थन दे दिया गया, जिसकी आगे चलकर बड़ी आलोचना हुई।

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