यह घोटाला राशि बैंक के तीसरी तिमाही के शुद्ध मुनाफे 503 करोड़ रुपये से भी ज्यादा है। UBS का अनुमान है कि यह रकम आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के वित्त वर्ष 2026 के टैक्स के बाद के मुनाफे का लगभग 22% हो सकती है। हालांकि UBS ने यह भी कहा कि बैंक की नेटवर्थ पर इसका असर करीब 1% ही रहेगा। मॉर्गन स्टेनली का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026 के टैक्स से पहले के मुनाफे पर इसका असर लगभग 20% तक हो सकता है। जेफरीज का कहना है कि बैंक को अपने ऑपरेशनल कंट्रोल को मजबूत करना होगा और यह साफ करना होगा कि यह समस्या किसी और ग्राहक तक नहीं फैली है।
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कहां पहुंची कीमत?
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के शेयर शुक्रवार को 83.56 रुपये पर बंद हुए थे। सोमवार को यह बड़ी गिरावट के साथ 75.21 रुपये पर खुले। बाद में इसमें और गिरावट आ गई। देखते ही देखते यह शेयर 20 फीसदी के लोअर सर्किट तक लुढ़ककर 66.85 रुपये पर आ गया। दोपहर 2:30 बजे यह शेयर 16.53% की गिरावट के साथ 69.75 रुपये पर कारोबार कर रहा था। इन्वेस्टेक ने ‘बाय’ रेटिंग बरकरार रखी है, लेकिन अपने टारगेट प्राइस को 92 रुपये से घटाकर 105 रुपये कर दिया है। उन्होंने कहा कि अंतिम असर जांच, रिकवरी और दावों के सत्यापन पर निर्भर करेगा।
कब तक रहेगी गिरावट?
नोमुरा के अंकित बिहारी ने बताया कि बैंक के फाइनेंशियल्स पर असली असर इस बात पर निर्भर करेगा कि धोखाधड़ी वाले खातों में जमा रकम कितनी वसूल हो पाती है, जो दूसरे बैंकों में हैं। साथ ही, इसमें शामिल संस्थाओं की देनदारियां और कानूनी रिकवरी प्रक्रिया भी अहम होगी।
उन्होंने गवर्नेंस और ब्रांच लेवल कंट्रोल को लेकर चिंताएं जताईं। उन्होंने यह भी कहा कि आईडीएफसी फर्स्ट बैंक का रिटेल डिपॉजिट-आधारित मॉडल है, इसलिए उसकी प्रतिष्ठा बहुत मायने रखती है। जब तक फॉरेंसिक जांच के नतीजे और वित्तीय असर साफ नहीं हो जाते, तब तक शेयर दबाव में रह सकते हैं।
आईडीएफसी बैंक में क्या हुआ?
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने बताया है कि उसके चंडीगढ़ ब्रांच के कुछ कर्मचारियों ने हरियाणा सरकार से जुड़े खातों में बिना इजाजत पैसे का लेन-देन किया। इसकी वजह से करीब 590 करोड़ रुपये की जमा राशि में गड़बड़ी पाई गई। यह समस्या 18 फरवरी 2026 को तब सामने आई जब हरियाणा राज्य सरकार की संस्थाओं ने खातों में वास्तविक शेष राशि और खाताधारकों द्वारा दावा की गई राशि के बीच अंतर पाया।
इस मामले में चार ब्रांच कर्मचारियों पर शक है, जिन्हें निलंबित कर दिया गया है। बैंक ने पुलिस में शिकायत दर्ज करा दी है, अपने ऑडिटर को भी बता दिया है और एक स्वतंत्र फोरेंसिक जांच के लिए KPMG को भी बुलाया है। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO वी. वैद्यनाथन ने इस मामले को ज्यादा बढ़ने से रोकने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि यह गड़बड़ी सिर्फ एक जगह हुई है और यह बैंक के सिस्टम में कोई बड़ी खराबी नहीं है, बल्कि कुछ लोगों की मिलीभगत का नतीजा है।













