यह घाटा इसलिए भी बड़ा है क्योंकि जून में हुए ड्रीमलाइनर विमान हादसे में 240 से ज्यादा लोगों की जान चली गई थी। इस हादसे ने कंपनी की सालों की मेहनत पर पानी फेर दिया। एयर इंडिया के मालिक (टाटा ग्रुप और सिंगापुर एयरलाइंस) इस साल घाटे से उबरने की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन अब यह संभव नहीं लग रहा है। पाकिस्तान ने भारत के साथ सैन्य झड़प के बाद अपना हवाई क्षेत्र भारतीय विमानों के लिए बंद कर दिया था। इसकी वजह से एयर इंडिया को यूरोप और अमेरिका जाने के लिए लंबे रास्ते से उड़ान भरनी पड़ी, जिससे खर्च बढ़ गया।
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एयरलाइन इंडस्ट्री के लिए कैसा रहा साल
यह साल भारतीय एयरलाइन इंडस्ट्री के लिए भी काफी उथल-पुथल भरा रहा। उड़ानों में देरी हो रही थी और एक दूसरी बड़ी एयरलाइन इंडिगो ने बड़े पैमाने पर उड़ानें रद्द कर दी थीं। इससे इस बाजार में सिर्फ दो बड़ी कंपनियों के होने पर भी सवाल उठ रहे हैं। एयर इंडिया के प्रबंधन ने एक नई पांच साल की योजना बनाई थी, जिसमें तीसरे साल में मुनाफा होने की उम्मीद जताई गई थी। लेकिन बोर्ड ने इस योजना को खारिज कर दिया और कंपनी को और तेजी से सुधार करने के लिए कहा है।
तीन साल में 322.1 अरब का घाटा
बिजनेस इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म Tofler के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक एयर इंडिया ने पिछले तीन सालों में 322.1 अरब रुपये का घाटा उठाया है। पिछले साल अक्टूबर में ब्लूमबर्ग न्यूज ने खबर दी थी कि एयरलाइन ने कम से कम 100 अरब रुपये की नई मदद मांगी थी।
यह लगातार बढ़ता घाटा दोनों मालिकों के लिए चिंता का विषय बन गया है। टाटा ग्रुप ने नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की तलाश शुरू कर दी है, जो कैम्पबेल विल्सन की जगह लेंगे। हालांकि, यह तलाश विमान हादसे की रिपोर्ट आने तक पूरी नहीं हो सकती है।













