दुनिया भर से मिल रहे कुछ सकारात्मक संकेतों के बावजूद भारतीय बाजार में अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है। हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन सेंसेक्स की शुरुआत तेजी के साथ 82,335.94 पर हुई थी। यह 82,516.27 के ऊपरी स्तर तक भी पहुंचा, लेकिन ज्यादा देर टिक नहीं पाई। ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली शुरू हो गई। यह बिकवाली ऐसे समय में आई जब एक दिन पहले ही बाजार ने लगातार तीन दिनों की गिरावट का सिलसिला तोड़ा था। शुक्रवार को सुबह के समय एशियाई बाजारों में आई तेजी और ग्रीनलैंड से जुड़ी भू-राजनीतिक चिंताओं में कमी आने से बाजार को कुछ सहारा मिला था।
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विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की बिकवाली बाजार पर सबसे बड़ा दबाव बना रहा। गुरुवार को FIIs ने 2,550 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। यह जनवरी में लगातार 13वीं बार था जब उन्होंने बिकवाली की। इस महीने FIIs सिर्फ एक दिन 2 जनवरी को ही खरीदार बने थे। साल 2025 में विदेशी बिकवाली और घरेलू खरीदारों के बीच जो खींचतान देखने को मिली थी, वह 2026 में भी जारी है।
रुपये में गिरावट
घरेलू संपत्तियों पर दबाव तब और बढ़ गया जब भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले एक नए रेकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। इससे इक्विटी बाज़ारों में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति और बढ़ गई। रुपया 91.7425 के पिछले निचले स्तर को पार कर 91.77 तक गिर गया, जो दिन में लगभग 0.2% की गिरावट थी। इस गिरावट की मुख्य वजह कॉर्पोरेट्स और आयातकों की तरफ से डॉलर की लगातार मांग थी।
इस मांग ने करेंसी मार्केट में शुरुआती स्थिरता को खत्म कर दिया और रुपये पर पहले से मौजूद दबाव को और बढ़ा दिया। रुपये का यह नया रेकॉर्ड निचला स्तर कैपिटल आउटफ्लो और डॉलर की बढ़ी हुई मांग के बारे में चिंताओं को दर्शाता है। इसने स्थानीय शेयरों में निवेशकों के भरोसे को और कम कर दिया।














