हालांकि अधिकारियों ने अब तक छिपाई गई इनकम पर टैक्स और पेनल्टी की गणना नहीं की है। उनका कहना है कि उन्होंने जिस सॉफ्टवेयर की जांच की है, वह देश के टोटल रेस्टोरेंट बिलिंग सॉफ्टवेयर मार्केट में करीब 10 फीसदी कंट्रोल करता है। जांचकर्ताओं ने 1.8 लाख से अधिक रेस्टोरेंट्स के डेटा को खंगालने के लिए डेटा एनालिसिस और एआई टूल्स का इस्तेमाल किया। इसमें जेनरेटिव एआई भी शामिल है। देशभर में कुल 70,000 करोड़ रुपये की बिक्री में से 13,317 करोड़ रुपये का डेटा डिलीट किया गया।
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कहां हुई सबसे ज्यादा गड़बड़ी?
आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में 5,141 करोड़ रुपये की सेल को छिपाया गया। दोनों राज्यों में 40 रेस्टोरेंट्स के सैंपल की फिजिकल और डिजिटल जांच की गई। इनमें करीब 400 करोड़ रुपये की सेल छिपाने का पता चला है। सबसे ज्यादा गड़बड़ी तमिलनाडु, कर्नाटक, तेलंगाना, महाराष्ट्र और गुजरात में सामने आई है। कर्नाटक में 2,000 करोड़ रुपये, तेलंगाना में 1,500 करोड़ रुपये और तमिलनाडु में 1,200 करोड़ रुपये का सेल्स डेटा डिलीट किया गया।
अधिकारियों ने बताया कि कुछ रेस्टोरेंट्स ने इनकम टैक्स रिटर्न में कम सेल्स दिखाई लेकिन रेकॉर्ड डिलीट करने की जहमत तक नहीं उठाई। सैंपल के आधार पर अधिकारियों का अनुमान है कि करीब 27 फीसदी सेल्स को छिपाया गया। अधिकारियों ने अहमदाबाद में बिलिंग सॉफ्टवेयर प्रोवाइडर कंपनी के सेंटर से डेटा एक्सेस किया। इसे हैदराबाद में इनकम टैक्स विभाग के डिजिटल फोरेंसिक एंड एनालिटिक्स लैब में एनालाइज किया गया।













