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  • 1 लाख रुपये महीने खा रही आपकी लग्जरी कार… सीए की चेतावनी, कहा- 4.5 करोड़ कमाने का मौका

    नई दिल्ली: अगर आप लग्जरी कार खरीदने का प्लान बना रहे हैं तो पहले सोचें कि क्या यह सिर्फ दिखावे के लिए तो नहीं है? दरअसल, एक चार्टर्ड अकाउंटेंट ने लग्जरी कार खरीदने को लेकर कड़ी चेतावनी जारी की है। सीए नितिन कौशिक (Nitin Kaushik) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में दावा


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    By Azad Hind Desk फरवरी 25, 2026
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    नई दिल्ली: अगर आप लग्जरी कार खरीदने का प्लान बना रहे हैं तो पहले सोचें कि क्या यह सिर्फ दिखावे के लिए तो नहीं है? दरअसल, एक चार्टर्ड अकाउंटेंट ने लग्जरी कार खरीदने को लेकर कड़ी चेतावनी जारी की है। सीए नितिन कौशिक (Nitin Kaushik) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में दावा किया कि 50 लाख रुपये की लग्जरी कार खरीदना लाइफस्टाइल अपग्रेड नहीं, बल्कि पैसा बर्बाद करना है। उनके मुताबिक लग्जरी कार खरीदने के बाद हर महीने एक लाख रुपये महीने का खर्चा आता है, जिससे काफी पैसा बर्बाद होता है। जबकि उस समय में करोड़ों रुपये कमाए जा सकते हैं।
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    50 लाख रुपये की कार का गणित

    सीए नितिन कौशिक ने अपनी पोस्ट में 50 लाख रुपये की लग्जरी कार का गणित समझाया है, जो काफी चौंकाने वाला है। उन्होंने पोस्ट में बताया है कि 50 लाख रुपये की कार की कीमत शोरूम से निकलते ही 20 फीसदी कम हो जाती है। इसके बाद कई वर्षों तक चलने वाली ईएमआई, महंगा बीमा और नियमित सर्विस-मेंटेनेंस का खर्च अलग देना पड़ता है। उनका कहना है कि जब इन सभी लागतों को जोड़ा जाता है, तो मालिक हर महीने 1 लाख रुपये से अधिक की संपत्ति खर्च कर रहा होता है। यानी साल में 12 लाख रुपये का खर्च। यह सिर्फ खर्च नहीं, बल्कि एक तरह से पैसे की बर्बादी है।

    बना सकते हैं करोड़ों की रकम

    नितिन कौशिक ने समझाया है कि इस रकम से करोड़ों रुपये बनाए जा सकते हैं। उन्होंने अपनी पोस्ट में बताया है कि अगर कोई व्यक्ति कार पर सालाना 12 लाख रुपये खर्च करने के बजाय उसी रकम को जमीन जैसे एसेट में निवेश करे, तो तस्वीर बदल सकती है। उन्होंने विकसित हो रहे कॉरिडोर क्षेत्रों में जमीन पर 25% सालाना रिटर्न की बात कही। इस अनुमान के आधार पर उनका दावा है कि 10 वर्षों में यह निवेश लगभग 4.5 करोड़ रुपये का पोर्टफोलियो बन सकता है। वहीं दूसरी ओर, 50 लाख की कार कुछ वर्षों बाद घटकर शायद 8 लाख रुपये की रह जाए।

    भावनात्मक फैसला या वित्तीय स्वतंत्रता?

    अपनी पोस्ट के आखिर में नितिन कौशिक ने सवाल उठाया कि क्या लोग नई कार की चमक और ब्रांड वैल्यू के लिए अपने कर्ज-मुक्त भविष्य की कीमत चुका रहे हैं? उनका कहना है कि कई हाई इनकम वाले लोग भी यह नहीं समझ पाते कि वे लंबे समय में कितनी संपत्ति खो रहे हैं। उन्होंने लिखा कि जब यह अहसास होता है कि एक कार की कीमत आपने अपनी आने वाली 20 साल की वित्तीय स्वतंत्रता से चुकाई है, तब सफलता का अहसास फीका पड़ सकता है।

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