दिल्ली के आया नगर में हुई इस खौफनाक हत्या ने हर किसी को दहला दिया। रतन लोहिया के शरीर से 1-2 नहीं पूरी 72 गोलियां चलाई गईं। 69 गोलियां रतन के शरीर में धंसी। दिल्ली के क्राइम इतिहास में यह शायद अपने आप में एक रिकॉर्ड है, जब किसी शख्स पर इतनी ज्यादा गोलियां बरसाई गई हों। आखिर रतन लोहिया का कसूर क्या था? सिर्फ एक..हत्या के आरोपी शख्स का पिता होना। करीब डेढ़ महीने के बाद दिल्ली पुलिस को इस मामले में कामयाबी हाथ लगी है। दो अपराधियों को एनकाउंटर के बाद गिरफ्तार किया गया है। यह मामला क्या था, क्यों रतन लोहिया को इतनी खौफनाक मौत मिली, विदेश में बैठे गैंगस्टर्स का दिल्ली के गांव में हुए हत्याकांड से क्या कनेक्शन है, आइए जानते हैं पूरी कहानी…
दीपक और अरुण की दोस्ती से कहानी शुरू
यह कहानी शुरू होती है दीपक और अरुण की दोस्ती से। दोनों पड़ोसी थे और एक ही समाज से थे। दोनों के सरनेम भी एक थे। दीपक अपने पिता रतन लोहिया के साथ डेयरी के बिजनेस में साथ देता था। साथ ही स्कूल वैन भी चलाया करता था। लेकिन कोविड ने रोजगार छीन लिया। इस बीच दीपक की अरुण से दोस्ती बढ़ती चली गई। दोनों साथ घूमते..हुक्का गुड़गुड़ाते। अरुण ने दीपक से रियल स्टेट के बिजनेस में पार्टनरशिप करने का ऑफर दे दिया। रतन के परिवार की मानें तो दीपक ने इस बिजनेस में 25 लाख रुपये लगाए थे।
पैसों ने दोस्ती को दुश्मनी में बदला
जल्द ही पैसों को लेकर दोनों की दोस्ती दुश्मनी में बदलने लगी। दीपक ने पैसा वापस मांगना शुरू किया और अरुण टालमटोल करता रहा। धीरे-धीरे मनमुटाव बढ़ने लगा। अप्रैल, 2024 में कथित तौर पर अरुण ने कुछ लोगों को भेजकर दीपक और उसकी फैमिली को पिटवा दिया। दीपक ने पुलिस में शिकायत की, लेकिन बाद में मामला गांव की पंचायत में सुलझ गया। अरुण को माफी मांगनी पड़ी। लेकिन मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। अब इस कहानी में खूनी मोड़ आने वाला था।
सरेआम अरुण की हत्या
15 मई का दिन था। अरुण अपनी स्कोर्पियो में साकेत कोर्ट से घर लौट रहा था। साथ में अरुण के पिता भी थे। छतरपुर मेट्रो स्टेशन के पास ऑल्टो में आए 2-3 हमलावरों ने गाड़ी को ट्रैफिक सिग्नल पर रुकवा दिया। जैसे ही अरुण ने शीशा ने नीचे किया, उस पर एक के बाद एक 10 गोलियां दागी गई। पुलिस ने दीपक के अलावा 2 और लोगों को गिरफ्तार कर लिया। दीपक के परिवार वालों पर भी केस दर्ज हुआ।
दीपक के पिता ने मंगवाई बुलेटप्रूफ जैकेट
दीपक जेल चला गया। लेकिन अरुण की हत्या के एक साल बाद भी उसकी फैमिली को धमकियां मिलती रहीं। यहां तक कि गांववाले भी उनके साथ उठने-बैठने से बचने लगे। इन सब से घबराए दीपक के पिता रतन लोहिया को उनकी बेटी ने बुलेटप्रूफ जैकेट खरीदने की सलाह दी। रतन ने एक रिटायर्ड फौजी से बुलेटप्रूफ जैकेट खरीद ली। हालांकि वह अक्सर कहा करते कि उनकी दुश्मनी दीपक से है, हमसे नहीं।
बुलेटप्रूफ जैकेट के बारे में जानते थे शूटर
फिर तारीख आई 30 नवंबर। रतन रोज की तरह बुलेप्रूफ जैकेट पहनकर अपनी डेयरी के लिए निकला। लेकिन शायद शूटर्स को भी इस बारे में पता था। इसलिए पहली 3 गोली सिर में मारी गई। बदले की आग यहीं ठंडी नहीं हुई। रतन के मुर्दा शरीर पर गोलियों की बारिश शुरू हो गई। पुलिस के मुताबिक कुल 72 गोलियां चलाई गईं, जिनमें से 69 रतन के शरीर में लगी। करीब 4 मिनट तक यह खौफनाक मंजर चलता रहा। गोलियां खत्म होती तो फिर से मैगजीन लोड करते और फिर फायरिंग शुरू कर देते। ठीक गैंग्स ऑफ वासेपुर जैसे।
विदेश में बैठे गैंगस्टर का रोल
अब दिल्ली पुलिस ने 2 शूटर्स को गिरफ्तार किया है। साथ ही यह भी पता चला है कि इस कत्ल के पीछे विदेश में बैठे गैंगस्टर नीरज फरीदपुरिया का दिमाग था। उसी ने शूटर भेजे थे। फरीदपुरिया गैंगस्टर हिमांशु उर्फ भाऊ के साथ मिलकर सिंडिकेट चला रहा है। इन्हीं ने मिलकर इस खतरनाक कत्ल की साजिश रची थी।














