अगर यह मामला तूल पकड़ता है तो इससे अमेरिका में 10 ट्रिलियन डॉलर का निवेश खतरे में पड़ सकता है जो अमेरिकी जीडीपी के एक तिहाई हिस्से के बराबर है। अमेरिका में यूरोप का फाइनेंशियल एक्सपोजर कभी भी इतना अधिक नहीं था। अमेरिकन एसेट्स में ईयू के निवेशकों की हिस्सेदारी 10 ट्रिलियन डॉलर है। यूएस इक्विटीज में यूरोपीय निवेशकों की होल्डिंग 6 ट्रिलियन डॉलर है। यह ईयू निवेशकों की अमेरिका में कुल होल्डिंग का 58 फीसदी है। इसी तरह ट्रेजरीज में यूरोपियन निवेशकों की हिस्सेदारी 2 ट्रिलियन डॉलर यानी 19 फीसदी है।
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डेनमार्क की होल्डिंग
अगर यूके, नॉर्वे और स्विट्जरलैंड को भी शामिल कर लिया जाए तो अमेरिका की ट्रेजरी होल्डिंग में यूरोप की हिस्सेदारी 40 फीसदी हो जाएगी। अमेरिका के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक ईयू के निवेशकों की यूएस कॉरपोरेट और अन्य बॉन्ड्स में भी 2 ट्रिलियन डॉलर की होल्डिंग्स है जबकि एजेंसी बॉन्ड्स में 225 अरब डॉलर का निवेश है। अगर यूरोपीय देशों ने अमेरिका के डेट मार्केट से अपनी होल्डिंग खींच ली तो अमेरिका के सामने मुश्किल पैदा हो सकती है।
इस बीच अमेरिका की ट्रेजरी होल्डिंग्स में डेनमार्क की हिस्सेदारी रेकॉर्ड लो पर पहुंच गई है। यह केवल 9 अरब डॉलर रह गई है जो 14 साल में सबसे कम है। पिछले एक साल में डेनमार्क ने यूएस ट्रेजरी में अपनी होल्डिंग में 4 अरब डॉलर यानी 30 फीसदी कटौती की है। 2016 से डेनमार्क अपनी होल्डिंग आधी कर चुका है। अमेरिकन ट्रेजरी में डेनमार्क की होल्डिंग यूरोपीय देशों की कुल हिस्सेदारी का महज 1 फीसदी है। हाल में भारत समेत कई देशों ने यूएस डेट मार्केट में अपनी हिस्सेदारी कम की है।
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अमेरिका का कर्ज
उधर अमेरिका का कर्ज लगातार बढ़ता जा रहा है। फेडरल गवर्नमेंट का 26 फीसदी डेट अगले 12 महीने में मैच्योर होने जा रहा है। इसका मतलब है कि 10 ट्रिलियन डॉलर का कर्ज आने वाले साल में ज्यादा ब्याज दर पर रिफाइनेंस करना होगा। यह सबकुछ ऐसे समय हो रहा है जबकि यूएस ट्रेजरी ने निकट भविष्य में इंटरेस्ट कॉस्ट को कम करने के लिए शॉर्टर बॉन्ड जारी करना शुरू कर दिया है।












