20 जनवरी को नालसा की एप्लिकेशन पर आदेश
शीर्ष अदालत की तरफ से यह स्पष्टीकरण इसलिए आया क्योंकि हाई कोर्ट ने 2023 के आदेश को अलग-अलग तरह से लागू करना शुरू कर दिया था। इसमें जिन मौतों में मुआवजा दिया गया था और मामले सुलझा लिए गए थे, उनमें अधिक मुआवजे के दावों से निपटने के लिए कोई एक जैसे स्टैंडर्ड नहीं थे।
20 जनवरी का यह आदेश नेशनल लीगल सर्विस अथॉरिटी (NALSA) की एक एप्लीकेशन पर आया था, जिसमें अलग-अलग हाई कोर्ट के फैसलों का हवाला दिया गया था। कुछ हाई कोर्ट ने पहले से तय मामलों को फिर से खोला और मुआवजा ₹10 लाख से बढ़ाकर ₹30 लाख कर दिया। दूसरों ने ऐसा करने से मना कर दिया।
नालसा की कोर्ट में दलील
NALSA की तरफ से पेश हुईं एडवोकेट रश्मि नंदकुमार ने कहा कि विचारों में मतभेद के कारण सिर्फ दो ही संभावनाएं सामने आईं। नंदकुमार ने कहा कि मैनुअल स्कैवेंजर या खतरनाक सफाई काम में लगे व्यक्ति के आश्रित, जिनकी मौत 20 अक्टूबर, 2023 से पहले हुई थी और जिन्हें ₹10 लाख का मुआवजा मिला था, वे अतिरिक्त 20 लाख रुपये के हकदार होंगे। दूसरी संभावना यह थी कि वे किसी भी अतिरिक्त मुआवजे के हकदार नहीं होंगे।
सुप्रीम कोर्ट की मदद कर रहे सीनियर एडवोकेट के परमेश्वर ने बताया कि ₹10 लाख का मुआवजा मार्च 2014 के पिछले फैसले के अनुसार दिया गया था। उन्होंने आगे कहा कि अगर इस फैसले का पालन किया जाता है, तो मामलों को दोबारा खोलने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए। परमेश्वर ने कहा कि अगर 2023 के फैसले से पहले भी मौतें हुई हैं, तो उन्हें नए मुआवज़े के नियम के तहत माना जाना चाहिए, अगर उन्हें आज तक कुछ नहीं मिला है।














