उन्होंने पोस्ट में लिखा है कि उनके दोस्त के पास दिल्ली में एक मकान है। यह पुश्तैनी घर है जिसे उनके दादा ने करीब 40 साल पहले खरीदा था। इस मकान की कीमत आज करीब 100 करोड़ रुपये है। अक्षत बताते हैं कि उनके दोस्त की आज उसकी कुल नेटवर्थ करीब 110 करोड़ रुपये है, लेकिन इसमें से लगभग 90% संपत्ति सिर्फ एक ही मकान में फंसी हुई है।
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ईडी और कानूनी विवाद का डर
- अक्षत का मानना है कि संपत्ति की कीमत बेशक ज्यादा हो, लेकिन उससे नियमित आय (कैश फ्लो) नहीं हो रही। उन्होंने पोस्ट में लिखा है कि घर से भावनात्मक जुड़ाव होने के कारण बेचने की संभावना बेहद कम है।
- अक्षत ने अपनी पोस्ट में मकान बेचने पर ईडी का भी जिक्र किया है। उनका कहना है कि अगर वह दोस्त मकान बेचता भी है तो 70 करोड़ रुपये की रकम ब्लैक में मिल सकती है। ऐसे में ईडी का छापा पड़ने का डर बना रहेगा।
- वहीं वह बताते हैं कि मकान को किराये पर देने में कानूनी विवाद का डर है। अगर किरायेदार खाली न करे तो लंबा प्रॉपर्टी विवाद खड़ा हो सकता है। ऐसे में 100 करोड़ की संपत्ति होने के बावजूद नकद आय लगभग शून्य है। इस स्थिति को वह ‘पेपर रिच’ यानी कागजों पर अमीर होना बताते हैं।
‘लिक्विड वेल्थ’ वालों की अलग स्थिति
अक्षत का कहना है कि उनके दोस्त से विपरीत ऐसे लोग भी हैं जिनके पास 10 करोड़ रुपये की लिक्विड वेल्थ है और वे उस पर 10% रिटर्न के हिसाब से हर साल 1 करोड़ रुपये का कैश फ्लो बना रहे हैं। ऐसे लोग खुद को ज्यादा अमीर महसूस करते हैं, क्योंकि उनके पास नियमित आय का सोर्स है। उनका मानना है कि केवल बड़ी संपत्ति होना पर्याप्त नहीं है। असली संपन्नता का अहसास तब होता है जब उस संपत्ति से नियमित नकदी प्रवाह होता रहे।
निवेशकों को दी सीख
अक्षत ने अपनी पोस्ट के अंत में लोगों को सीख भी है। उनके निवेशकों को सिर्फ एसेट वैल्यू पर नहीं, बल्कि कैश फ्लो पर ध्यान देना चाहिए। उनका कहना है कि तरल संपत्तियों में निवेश करें। जैसे- शेयर, म्यूचुअल फंड आदि। वहीं ऐसे एसेट रखें जिनसे इनकम पैदा हो। जैसे- किराये पर देने योग्य प्रॉपर्टी या शॉर्ट-टर्म रेंटल मॉडल। एसेट से कमाई के तरीके सीखें। जैसे- शेयरों से डिविडेंड या अन्य माध्यम से नियमित इनकम।













