विशाल लक्ष्य पर भारी पड़ी स्मृति की पारी
जब आरसीबी ने ग्रेस हैरिस का विकेट जल्दी गंवा दिया, तो 204 रनों का पहाड़ और भी ऊंचा लगने लगा। लेकिन मंधाना ने पहली ही गेंद पर शानदार ऑफ-ड्राइव लगाकर अपने इरादे साफ कर दिए। मंधाना ने अपनी इस पारी की रणनीति पारी के ब्रेक के दौरान ही बना ली थी। उन्होंने कोच से कहा था कि यह पिच ऐसी नहीं है जहां 6 ओवर में मैच जीत लिया जाए, बल्कि हमें अंत तक टिके रहना होगा।
तकनीक और टाइमिंग का बेजोड़ मेल
मंधाना का फुटवर्क और टाइमिंग देखकर कोई नहीं कह सकता था कि वह शारीरिक रूप से 100 प्रतिशत फिट नहीं थीं। उन्होंने दिल्ली के हर प्लान को फेल कर दिया। जब दिल्ली ने उन्हें फंसाने के लिए स्पिनर्स को लगाया, तो मंधाना ने क्रीज का इस्तेमाल कर उन्हें बाउंड्री के पार भेजा। उन्होंने स्पिन के खिलाफ 210 के स्ट्राइक रेट से रन बनाए, जो उनके शानदार स्किल्स को दर्शाता है। मंधाना की कप्तानी भी इस मुकाबले में काफी कमाल की रही।
RCB कोच की नजर में बैटिंग नर्ड हैं मंधाना
आरसीबी के हेड कोच मालोलन रंगराजन ने बताया कि ‘मंधाना अपनी बल्लेबाजी को लेकर एक नर्ड की तरह हैं। वह अपनी ग्रिप, बैट लिफ्ट और टैपिंग जैसी छोटी-छोटी बारीकियों पर घंटों काम करती हैं।’ फाइनल से दो दिन पहले अभ्यास सत्र के दौरान ही उन्होंने अपनी लय हासिल कर ली थी। जब मैच के दिन उन्हें बुखार हुआ, तो उन्होंने कोच से बस इतना कहा, ‘कोई समस्या नहीं, मैं वहां रहूंगी।’ इसी से साफ होता है कि स्मृति इस खिताब को जीतने के लिए हर संभल कोशिश कर रही थी।
ऐतिहासिक चेज में स्मृति मंधाना का कमाल
आरसीबी ने 204 रनों का लक्ष्य हासिल कर डब्ल्यूपीएल इतिहास का सबसे बड़ा रन चेज सफलतापूर्वक पूरा किया। जब 19वें ओवर में मंधाना आउट होकर पवेलियन लौट रही थीं, तब मैच लगभग आरसीबी की मुट्ठी में था। उनकी इस पारी ने दिल्ली के गेंदबाजी आक्रमण को पूरी तरह से दिशाहीन कर दिया और आरसीबी को तीन साल में दूसरी बार चैंपियन बना दिया।













