अहमदाबाद में हुआ था हादसा
एयर इंडिया की बोइंग 787-8 विमान संख्या AI171, जो लंदन के गैटविक हवाई अड्डे के लिए रवाना हुई थी, का संचालन पायलट-इन-कमांड कैप्टन सुमीत सभरवाल और सह-पायलट कैप्टन क्लाइव कुंदर कर रहे थे। अहमदाबाद से उड़ान भरने के बाद यह विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें कुल 260 लोगों की मौत हो गई, जिनमें विमान में सवार 241 यात्री और चालक दल के सदस्य शामिल थे।
अब तक केंद्र सरकार ने दाखिल नहीं किया जवाब
बुधवार को चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच को, याचिकाकर्ता एनजीओ ‘सेफ्टी मैटर्स फाउंडेशन’ की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने बताया कि अब तक केंद्र सरकार और विमान दुर्घटना जांच बोर्ड (AAIB) में से किसी ने भी याचिका पर अपना जवाब दाखिल नहीं किया है। भूषण ने कहा कि पूरे पायलट संघ का कहना है कि बोइंग 787 विमान में कोई समस्या है और इसे ग्राउंड किया जाना चाहिए।
बुधवार को पूरी हो जाएगी SIR की याचिकाओं की सुनवाई
इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि बुधवार को एसआईआर (मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण) से संबंधित याचिकाओं की सुनवाई पूरी हो जाएगी और हम आपको एक नजदीकी तारीख देंगे। पिछले वर्ष 13 नवंबर को शीर्ष अदालत ने कहा था कि दुर्घटना से संबंधित AAIB की प्रारंभिक रिपोर्ट में दिवंगत पायलट कैप्टन सुमीत सभरवाल को दोषी नहीं ठहराया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया था नोटिस
अदालत ने इस मामले में केंद्र सरकार और नागरिक उड्डयन महानिदेशक (DGCA) को नोटिस भी जारी किया था, जो कैप्टन सभरवाल के पिता पुष्कराज सभरवाल द्वारा दायर याचिका पर आधारित था। पुष्कराज सभरवाल और फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स ने एयर इंडिया की इस दुर्घटना की सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में, न्यायालय की निगरानी में जांच कराने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। शीर्ष अदालत इस दुर्घटना की स्वतंत्र और न्यायालय-निगरानी वाली जांच की मांग करने वाली तीन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिन्हें एक एनजीओ, एक विधि छात्र और दिवंगत पायलट के पिता द्वारा दायर किया गया था।














