ऐसे में अगर सरकार की ओर से कोई अपडेट नहीं आता, तो अगले 15 दिन बाद आप ऐसा WhatsApp अकाउंट फोन में नहीं चला पाएंगे, जिसका सिम आपके फोन में न लगा हो।
क्या है सिम बाइंडिंग?
सिम बाइंडिंग का मतलब है कि अगर आप अपने फोन से वह सिम निकाल देते हैं जिससे आप WhatsApp या किसी दूसरे मैसेजिंग ऐप को चला रहे हैं, तो वह ऐप चलना बंद हो जाएगा। इसका मतलब है कि अब WhatsApp जैसे तमाम मैसेजिंग ऐप कई डिवाइसेज पर बिना बार-बार वेरिफिकेशन के इस्तेमाल नहीं किए जा सकेंगे। फोन पर किसी भी मैसेजिंग ऐप को चलाने के लिए उस अकाउंट से जुड़ा सिम कार्ड फोन में जरूर होना चाहिए।
इसके अलावा जो मैसेजिंग ऐप्स डेस्कटॉप वर्जन को सपोर्ट करती हैं, उन्हें हर 6 घंटे में सेशन को ऑटोमैटिक लॉग-आउट करना पड़ेगा। इसका मतलब है कि अगर आप काम के सिलसिले में WhatsApp को कंप्यूटर से लिंक करके इस्तेमाल करते हैं, तो आपको हर 6 घंटे बाद कंप्यूटर पर WhatsApp को लिंक करना होगा।
क्यों आया नया आदेश?
इस फैसले के बारे में डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशंस यानी कि DoT का कहना था कि कई फ्रॉड करने वाले लोग भारत के नंबर वाली सिम बाहर ले जाकर या इंटरनेट कॉलिंग का इस्तेमाल कर लोगों को धोखा देते हैं। बता दें कि अब तक WhatsApp जैसे प्लेटफॉर्म सिर्फ एक बार मोबाइल नंबर वेरिफाई करवाते हैं, इसलिए अपराधियों के लिए इसे कई अलग-अलग डिवाइसेज पर इस्तेमाल कर पाना आसान हो जाता था। ऐसा कहा जा रहा है कि सिम बाइंडिंग से इन अपराधियों तक पहुंचना आसान होगा।
आप पर क्या असर पड़ेगा?
Azad Hind नजरिया: अगर बात आनलाइन होने वाली धोखाधड़ी को रोकने और लोगों की प्राइवेसी की रक्षा की है, तो सिम-बाइंडिंग से फायदा हो सकता है। हालांकि अगर सुविधा को देखा जाए, तो इससे लोगों को काफी परेशानी हो सकती है। सबसे पहले तो एक फोन पर अलग-अलग WhatsApp अकाउंट चला पाना नामुमकिन होगा। इसके अलावा उन लोगों को भी परेशानी होगी, जो अलग-अलग फोन में बिना उस अकाउंट का सिम डाले WhatsApp चलाते हैं, जिस नंबर पर WhatsApp अकाउंट बना है। इसके अलावा डेस्कटॉप वर्जन को हर 6 घंटे में ऑटोमैटिक तरीके से लॉग आउट कर देना भी प्रोफेशनल्स और काम काजी लोगों को परेशान कर सकता है।
हालांकि देखना होगा कि सरकार सिम बाइंडिंग लागू करने के लिए कंपनियों को और मोहलत देती है या फैसले में किसी तरह का बदलाव करती है या नहीं?













