डीसीपी (क्राइम) विक्रम सिंह के मुताबिक, दोनों वॉन्टेड बदमाशों की मूवमेंट बुधवार रात गाजीपुर पेपर मार्केट में होने का पता चला। दिल्ली पुलिस के एसीपी नरेंद्र बेनीवाल की देखरेख में बनी इंस्पेक्टर सुनील कुंडू, एसआई गुंजन और एएसआई सतेंदर की टीम को देर रात दोनों स्कूटर में आते दिखे, जिन्हें सरेंडर के लिए कहा गया। लेकिन दोनों ने गोलियां चलानी शुरू कर दी, जो हेड कॉन्स्टेबल प्रिंस और मोहित की बुलटप्रूफ जैकेट पर लगीं। जवाबी फायरिंग में असद और दानिश के पैरों में गोलियां मारी गई। दोनों गिरे तो पुलिस ने दबोच लिया।
सलीम के 15 पिस्टल की रार में हुए मर्डर
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, नदीम पिस्टल रिपेयरिंग का उस्ताद था। इसके पास सलीम के 15 पिस्टल थे, जिन्हें महफूज उर्फ बॉबी कबूतर मांग रहा था। नदीम के साथ पहले पिस्टल सप्लाई करने वाले असद ने 15 दिसंबर को नदीम-फजील के बड़े भाई को कॉल कर धमकी दी। शाम 5:00 बजे रिश्तेदार असद के घर जुटे, जो 15 पिस्टल लौटाने पर अड़ गया और मीटिंग का विडियो बना बॉबी को भेजा। नदीम ने रात 8:30 छह पिस्टल कबूतर के घर दे आया, लेकिन बाकी भी मांगे गए। नदीम ने बोला कि बेच दिए हैं और खरीदारों की डिटेल दे दी, जिनसे बात की गई तो उन्होंने लौटाने से इनकार करते हुए पैसे की डिमांड की। कबूतर समेत पांच बदमाशों ने देर रात दोनों की हत्या कर दी।
अवैध हथियार सप्लाई का खुलासा
पुलिस का दावा है कि अगस्त 2024 में सलीम पिस्टल को स्पेशल सेल ने गिरफ्तार किया। इसने मृतक नदीम के अवैध हथियार सप्लाई करने का खुलासा किया। नदीम ने नवंबर 2024 में अरेस्ट होने पर दानिश मल्ली और महफूज कबूतर समेत कई नाम बताए। दानिश तब से फरार था, जो नदीम की हत्या की फिराक में घूमने लगा। साजिश के तहत 15 दिसंबर देर रात चौहान बांगर में पांच शूटर आधे घंटे तक घात लगाए बैठे रहे। नदीम और फजील वहां से गुजरे तो दोनों पर 50 से ज्यादा गोलियां बरसा कर मौत के घाट उतार दिया।
बांगर पर 5 केस
चौहान बांगर का असद मृतक नदीम और फजील की बुआ का बेटा है। इस पर हत्या का प्रयास समेत पांच केस हैं। स्पेशल सेल ने असद को जीटीबी अस्पताल मर्डर में आरोपी अनस के साथ सितंबर 2024 को मुजफ्फरनगर में एनकाउंटर के बाद भी पकड़ा था। आखिरी बार इस पर 12 जुलाई 2025 को गोकुलपुरी में जानलेवा हमले का केस दर्ज हुआ था, जिसमें 29 अक्टूबर 2025 को जमानत मिली। दानिश ने एलएलबी की है, जो मकोका में वॉन्टेड महफूज उर्फ बॉबी शूटर उर्फ कबूतर का रिश्ते का भाई है। इस पर 2016 में डकैती-किडनैपिंग का केस दर्ज मिला है ।
मार्केट खराब करने का भी था झगड़ा
सीलमपुर का सलीम पिस्टल विदेश से हथियार मंगवा कर लॉरेंस बिश्नोई सिंडिकेट समेत कई गैंग्स को बेचता था। ये जिगाना पिस्टल सबसे पहले तस्करी कर भारत लाने वालों में था। इसे 2018 में विदेशी हथियारों की खेप के साथ अरेस्ट किया गया था, जो जमानत मिलने के बाद विदेश भाग गया। अगस्त 2024 में नेपाल में पकड़ा गया, जिस पर दस से ज्यादा केस हैं। बॉबी कबूतर, इसका भाई इमरान और दानिश मल्ली जिस पिस्टल को तीन से साढ़े तीन लाख रुपये में बेचते हैं, उन्हें नदीम एक लाख रुपये में देने लगा था। इसे लेकर भी नदीम से इनकी तनातनी चल रही थी। सलीम पिस्टल को क्राइम ब्रांच ने अब 2019 में गैंगस्टर अब्दुल नासिर-हाशिम बाबा गैंग पर लगे मकोका में भी गिरफ्तार कर लिया है।














