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  • 18 दिन का क्रूड, 21 दिन का पेट्रोल-डीजल, 12 दिन की गैस, ईरान संकट लंबा खिंचा तो क्या करेगा भारत?

    नई दिल्ली: ईरान और इजरायल/अमेरिका के बीच चल रही लड़ाई से भारत की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। भारत अपना ज्यादातर तेल और गैस आयात करता है। ऐसे में अगर पश्चिम एशिया में लड़ाई लंबी खिंचती है तो भारत के सामने ऊर्जा का संकट खड़ा हो सकता है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है


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    By Azad Hind Desk मार्च 3, 2026
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    नई दिल्ली: ईरान और इजरायल/अमेरिका के बीच चल रही लड़ाई से भारत की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। भारत अपना ज्यादातर तेल और गैस आयात करता है। ऐसे में अगर पश्चिम एशिया में लड़ाई लंबी खिंचती है तो भारत के सामने ऊर्जा का संकट खड़ा हो सकता है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान युद्ध कम से कम चार हफ्ते तक चल सकता है। ऐसे में होर्मुज की खाड़ी में जहाजों की आवाजाही लंबे समय तक बाधित हो सकती है। भारत सरकार ने इस स्थिति के निपटने के लिए आपात योजना पर काम शुरू कर दिया है। इनमें पेट्रोल और डीजल का एक्सपोर्ट कम करना, रूस के कच्चे तेल का आयात बढ़ाना और एलपीजी की राशनिंग शामिल है।

    ईटी की एक रिपोर्ट में इंडस्ट्री के सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि भारत के पास 17-18 दिन की डिमांड के बराबर क्रूड का भंडार है। इसी तरह रिफाइंड प्रोडक्ट्स यानी पेट्रोल-डीजल का स्टॉक 20-21 दिन का है जबकि एलएनजी का स्टॉक 10-12 दिन का रह गया है। भारत अपनी करीब 90 फीसदी एलएनजी खाड़ी देशों से मंगाता है। भारत अपने कुल उत्पादन में से करीब एक तिहाई पेट्रोल, एक चौथाई डीजल और आधा एटीएफ का निर्यात करता है। इनका एक्सपोर्ट रोककर देश में इनकी उपलब्धता बढ़ाई जा सकती है।

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    कच्चे तेल की कीमत

    पश्चिम एशिया में संकट से सोमवार को ऑयल और गैस की कीमत में काफी तेजी देखने को आई। ब्रेंट क्रूड करीब 10 फीसदी उछलकर 80 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई जबकि यूरोपियन गैस की कीमत में 40 फीसदी से अधिक उछाल आई। सोमवार को सऊदी अरब की रास तानुरा रिफाइनरी और कतर के एक एनएनजी प्लांट पर हमले के कारण प्रोडक्शन बंद कर दिया गया। साथ ही होर्मुज की खाड़ी में भी लगातार दूसरे दिन टैंकर की आवाजाही सीमित रही। इससे सप्लाई टाइट होने की आशंका पैदा हो गई है।

    इंडस्टी के एग्जीक्यूटिव और ऑयल मिनिस्ट्री के अधिकारी सप्लाई और डिमांड बनाए रखने के तरीकों की समीक्षा कर रहे हैं। हालांकि कुछ एनालिस्ट्स का कहना है कि ईरान ज्यादा दिन तक नहीं टिक पाएगा और होर्मुज की खाड़ी में तेजी से स्थिति सामान्य हो सकती है। पेट्रोलियम मिनिस्टर हरदीप पुरी ने एक्स पर पोस्ट किया, ‘हम स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। देश में पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की उपलब्धता बनाए रखने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।’

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    पेट्रोल-डीजल का एक्सपोर्ट

    सूत्रों का कहना है कि एमरजेंसी की स्थिति में पेट्रोल और डीजल का एक्सपोर्ट रोका जा सकता है। सबसे ज्यादा समस्या एलपीजी को लेकर है जहां भारत ज्यादातर आयात पर निर्भर है। भारत के पास इसकी ज्यादा इनवेंट्री नहीं है। भारत अपनी जरूरत की 85-90 फीसदी एलपीजी खाड़ी देशों से आयात करता है। इंडस्ट्री का अनुमान है कि अगर सप्लाई में कोई बाधा नहीं आती है तो भारत के पास दो हफ्ते से भी कम स्टॉक है। इनमें ऑनशोर इंवेंट्री और वे कार्गो शामिल हैं जो होर्मुज की खाड़ी को पार कर चुके हैं।

    इंडियन ऑयल, एचपीसीएल और एचपीसीएल ने कुछ चुनिंदा पेट्रोकेमिकल इंटिग्रेटेड रिफाइनरीज में एलपीजी का उत्पादन बढ़ाना शुरू कर दिया है। अगर होर्मुज की खाड़ी के नया स्टॉक नहीं आता है तो भारत की इंवेंट्री तेजी से खत्म हो जाएगी। हाल के महीनों भारत का करीब आधा क्रूड और एलएनजी आयात खाड़ी देशों से आया है। रूस से कच्चे तेल का आयात बढ़ाने पर भी विचार किया जा रहा है।

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    रूस से सप्लाई

    सूत्रों का कहना है कि रूस का काफी तेल अभी समुद्र में है और इसे तेजी से भारत की ओर मोड़ा जा रहा है। अगर ग्लोबल सप्लाई की स्थिति टाइट होती है तो अमेरिका का रुख नरम पड़ सकता है। इससे भारतीय रिफाइनिंग कंपनियां रूस से ज्यादा तेल खरीद सकती हैं। भारत ने हाल के महीनों में रूस से तेल की खरीदारी कम की है। हालांकि वह अब भी भारत का सबसे बड़ा सप्लायर बना हुआ है।

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