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  • ‘2 परमाणु देशों से लंबे युद्ध के लिए तैयार रहें’, CDS अनिल चौहान ने स्ट्रैटेजिक प्लानिंग पर भी दिया बड़ा बयान

    नई दिल्ली: भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा अब केवल सैन्य शक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें समाज के हर वर्ग की सक्रिय भागीदारी भी आवश्यक है। साथ ही रणनीतिक योजना भारत के समृद्ध इतिहास डीएनए का हिस्सा रही है, वर्तमान में हम केवल पश्चिमी विचारों पर निर्भर नहीं रह सकते हैं। ये बातें चीफ ऑफ


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    By Azad Hind Desk फरवरी 23, 2026
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    नई दिल्ली: भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा अब केवल सैन्य शक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें समाज के हर वर्ग की सक्रिय भागीदारी भी आवश्यक है। साथ ही रणनीतिक योजना भारत के समृद्ध इतिहास डीएनए का हिस्सा रही है, वर्तमान में हम केवल पश्चिमी विचारों पर निर्भर नहीं रह सकते हैं। ये बातें चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने शनिवार को हेमवती नंदन बहुगुणा विश्वविद्यालय में छात्रों को संबोधित करते हुए कही।

    उन्होंने कहा, प्राचीन काल से ही भारत में रणनीतिक चिंतन की समृद्ध परंपरा रही है। सदियों से स्ट्रैटेजिक प्लानिंग भारतीयों के DNA में शामिल रही है। धनुर्वेद में वर्णित जटिल व्यूह (युद्ध संरचनाएं) और तीरंदाजी से लेकर चाणक्य के अर्थशास्त्र में वर्णित राज्य-प्रबंधन और कूटनीति के सिद्धांतों तक हमारी जड़ें गहरी हैं। चाणक्य की रणनीतिक दृष्टि भारत की आधुनिक विदेश नीति और राष्ट्रीय दृष्टिकोण में आज भी झलकती होती है।

    मुगल शासन के दौरान रणनीतिक सोच में आया ठहराव: CDS

    सीडीएस अनिल चौहान ने आगे कहा, लगभग 800 साल तक मुगल शासन के दौरान भारत की रणनीतिक सोच में ठहराव सा आ गया था। उन्होंने कहा, भले ही हमें 1947 में आजादी मिल गई, लेकिन मानसिक आजादी और अपनी सोच को फिर से अपनाने में समय लगा।

    आत्मनिर्भर भारत पर दिया जोर

    उन्होंने आत्मनिर्भर पर जोर देते हुए कहा, सिर्फ पश्चिमी देशों की रणनीतियों पर निर्भर रहने से जीत नहीं मिल सकती। देश को निर्णायक जीत के लिए अपने हथियार, युद्ध की नीतियां और रणनीतिक योजनाएं खुद बनानी होंगी। यह ‘आत्मनिर्भर’ रक्षा सोच को बढ़ावा देने की बात है।

    CDS ने चीन-पाकिस्तान की ओर किया इशारा

    सीडीएस ने कहा आज की दुनिया में भारत के सामने अनोखी चुनौतियां हैं। पाकिस्तान और चीन की ओर इशारा करते हुए सीडीएस ने कहा, भारत के दो ऐसे पड़ोसी हैं जिनके पास परमाणु हथियार हैं और उन्होंने ‘अवैध रूप से भारतीय भूमि पर अतिक्रमण किया है।’

    हमें लंबे युद्धों के लिए तैयार रहना होगा…

    उन्होंने आगे कहा, परमाणु हथियारों की वजह से बड़े युद्ध की संभावना कम हो गई है लेकिन, आतंकवाद, आंतरिक अस्थिरता और सीमा विवाद जैसी समस्याएं अभी भी हैं। हमें लंबे युद्धों के लिए तैयार रहना होगा, लेकिन साथ ही छोटी, सटीक और स्मार्ट लड़ाई की रणनीतियों पर भी ध्यान देना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि युद्ध का मैदान अब सिर्फ जमीन और समुद्र तक सीमित नहीं है, बल्कि इंटेलिजेंस, साइबरस्पेस और सूचना युद्ध (Information warfare) में भी फैल गया है।

    एक सवाल-जवाब सत्र के दौरान, जनरल चौहान ने सेना में महिलाओं की भूमिका पर भी बात की। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना देश की महिलाओं को सशक्त बनाने की सोच के साथ आगे बढ़ रही है। सेना में महिलाओं को हर क्षेत्र में बराबर मौके और जिम्मेदारियां दी जा रही हैं। भर्ती और तरक्की पूरी तरह से योग्यता और समर्पण पर आधारित है, न कि लिंग पर।

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