• National
  • 2026 अंतरिक्ष के नाम, फिर चंद्रमा के करीब होगा इंसान, तो सूर्य के उग्र रूप को देखेगा भारत

    नई दिल्लीः साल 2026 अंतरिक्ष विज्ञान के लिहाज से दुनिया और भारत दोनों के लिए बेहद खास होने जा रहा है। एक ओर, 50 साल बाद इंसान फिर चांद के करीब पहुंचेगा, तो दूसरी तरफ भारत पहली बार सूर्य को उसके सबसे ज्यादा सक्रिय और उथल-पुथल वाले दौर में बेहद करीब से देख पाएगा। अंतरिक्ष


    Azad Hind Desk अवतार
    By Azad Hind Desk जनवरी 1, 2026
    Views
    728 x 90 Advertisement
    728 x 90 Advertisement
    300 x 250 Advertisement
    नई दिल्लीः साल 2026 अंतरिक्ष विज्ञान के लिहाज से दुनिया और भारत दोनों के लिए बेहद खास होने जा रहा है। एक ओर, 50 साल बाद इंसान फिर चांद के करीब पहुंचेगा, तो दूसरी तरफ भारत पहली बार सूर्य को उसके सबसे ज्यादा सक्रिय और उथल-पुथल वाले दौर में बेहद करीब से देख पाएगा।

    अंतरिक्ष यात्रियों चांद के चारों ओर भेजेगी नासा

    अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA 2026 में अपने आर्टेमिस 2 (Artemis 2) मिशन के तहत चार अंतरिक्ष यात्रियों को चांद के चारों ओर भेजेगी। ये यात्री करीब 10 दिन तक चांद की परिक्रमा करके पृथ्वी पर लौटेंगे। 1972 के बाद यह पहला मौका होगा जब इंसान चांद के पास पहुंचेगा।

    भारत का पहला सौर अवलोकन मिशन

    इस मिशन को भविष्य में चांद पर इंसानी लैंडिंग से पहले की बड़ी तैयारी माना जा रहा है। इसी साल भारत के लिए भी एक ऐतिहासिक वैज्ञानिक अवसर आने वाला है। आदित्य L-1 भारत का पहला सौर अवलोकन मिशन, 2026 में ऐसा काम करेगा जो पहले कभी नहीं हुआ। यह पहली बार होगा जब यह अंतरिक्ष वेधशाला सूरज को उसके सबसे सक्रिय दौर ‘सोलर मैक्सिमम’ में देख पाएगी।

    हर 11 साल में एक बार आता है सोलर मैक्सिमम

    NASA के मुताबिक, सोलर मैक्सिमम लगभग हर 11 साल में एक बार आता है। इसी दौरान, सूरज के चुंबकीय ध्रुव पलट जाते हैं। ठीक वैसे ही जैसे अगर पृथ्वी के उत्तर और दक्षिण ध्रुव आपस में में बदल जाएं। यह समय सूरज के के लिए सबसे ज ज्यादा अशांत माना जाता है, जब वह शांत अवस्था से तूफानी रूप में बदल जाता है।

    तेज गति से चलते हैं CME

    इस दौर में सूरज पर सोलर स्टॉर्म और कोरोनल मास इजेक्शन (CME) की संख्या अचानक बहुत बढ़ जाती है। सीएमई दरअसल सूरज की बाहरी परत, कोरोना, से निकलने वाले आग के गोले जैसे विशाल प्लाज्मा बादल होते हैं। इनमें चार्ज्ड कण होते हैं और इनका वजन एक ट्रिलियन किलो तक हो सकता है। ये बेहद तेज गति से चलते हैं, अगर कोई सीएमई सीधे पृथ्वी की ओर बढ़े तो वह सिर्फ 15 घंटे में सूरज से पृथ्वी तक की 15 करोड़ किलोमीटर की दूरी तय कर सकता है।

    इंसानी जीवन के लिए सीधा नहीं होते खतरा

    आम तौर पर ये इंसानी जीवन के लिए सीधा खतरा नहीं होते लेकिन इनसे पैदा होने वाले जिओमैग्नेटिक तूफान पृथ्वी के आसपास के अंतरिक्ष मौसम को बुरी तरह प्रभावित करते हैं। इसका असर सीधे-सीधे सैटेलाइट, जीपीएस, मोबाइल नेटवर्क, नेविगेशन सिस्टम और बिजली ग्रिड पर पड़ सकता है।

    रणनीतिक रूप से भी अहम होगा भारत का आदित्य L1

    फिलहाल पृथ्वी के आसपास करीब 11 हजार सैटलाइट मौजूद है, जिनमें भारत के 136 शामिल हैं। ऐसे में सूर्य की गतिविधियों पर नजर रखना बेहद जरूरी हो जाता है। यही वजह है कि 2026 में आदित्य एल 1 की भूमिका भारत के लिए रणनीतिक रूप से अहम होगी। इससे मिलने वाला डेटा न सिर्फ सैटलाइट सुरक्षा में मदद करेगा, बल्कि गगनयान जैसे मानव अंतरिक्ष मिशनों में अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा में भी काम आएगा।

    728 x 90 Advertisement
    728 x 90 Advertisement
    300 x 250 Advertisement

    हर महीने  ₹199 का सहयोग देकर आज़ाद हिन्द न्यूज़ को जीवंत रखें। जब हम आज़ाद हैं, तो हमारी आवाज़ भी मुक्त और बुलंद रहती है। साथी बनें और हमें आगे बढ़ने की ऊर्जा दें। सदस्यता के लिए “Support Us” बटन पर क्लिक करें।

    Support us

    ये आर्टिकल आपको कैसा लगा ? क्या आप अपनी कोई प्रतिक्रिया देना चाहेंगे ? आपका सुझाव और प्रतिक्रिया हमारे लिए महत्वपूर्ण है।