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  • 2030 तक रूस से युद्ध की तैयारी में यूरोप, हंगरी के पीएम विक्टर ओर्बन की बड़ी चेतावनी

    मॉस्को: हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बन ने शनिवार को कहा कि यूरोप ने 2030 तक रूस के साथ युद्ध करने का फैसला किया है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ यूरोपीय देशों में इसकी तैयारी पहले से की जा रही है। उनका यह बयान यूरोपीय देशों, खासकर रूस से सटे नाटो सहयोगियों में युद्ध की


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    By Azad Hind Desk फरवरी 15, 2026
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    मॉस्को: हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बन ने शनिवार को कहा कि यूरोप ने 2030 तक रूस के साथ युद्ध करने का फैसला किया है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ यूरोपीय देशों में इसकी तैयारी पहले से की जा रही है। उनका यह बयान यूरोपीय देशों, खासकर रूस से सटे नाटो सहयोगियों में युद्ध की बढ़ती आशंकाओं के बीच आया है। इन देशों ने न सिर्फ अपने नागरिकों को युद्ध के लिए तैयार रहने, बल्कि जरूरी साजो-सामान का स्टोर रखने की अपील की है।

    2030 तक रूस-यूरोप युद्ध

    पीएम ओर्बन ने कहा, “यूरोप ने फैसला किया है कि वह 2030 तक (रूस के साथ) युद्ध करेगा। ऐसा नहीं है कि वह ऐसा करना चाहता है, कर सकता है, या करने की योजना बना रहा है – उसने फैसला कर लिया है। उसने फैसला कर लिया है।” उन्होंने आगे कहा कि हंगरी और स्लोवाकिया को छोड़कर पूरे यूरोप में युद्ध की तैयारी की जा रही है।

    युद्ध की तैयारी कर रहे यूरोपीय देश

    उन्होंने कहा, “नौ [यूरोपीय] देशों में पहले से ही अनिवार्य मिलिट्री सर्विस है। कुछ जगहों पर, यह महिलाओं पर भी लागू होता है। लोगों को युद्ध की स्थिति में क्या करना है, इस बारे में निर्देश भेजे जा रहे हैं। मिलिट्री खर्च तेजी से बढ़ा है। यूक्रेन में सेना भेजने के लिए समझौते किए गए हैं।”

    रूस पर भड़के हैं यूरोपीय देश

    2022 में यूक्रेन पर रूसी हमले के बाद यूरोपीय देश भड़के हुए हैं। उन्होंने न सिर्फ रूस से ऊर्जा आयात रोक दिया है, बल्कि यूक्रेन को बड़े पैमाने पर हथियारों की सप्लाई भी की है। ऐसी भी रिपोर्ट्स हैं कि यूरोपीय सैन्य सलाहकार यूक्रेनी सेना की मदद कर रहे हैं। इसके अलावा, यूरोपीय देशों ने रूस के खिलाफ प्रतिबंधों की बौछार की हुई है। इस कारण रूस को अपने ऊर्जा आयात के लिए गैर यूरोपीय देशों का रुख करना पड़ा है।

    यूरोपीय देशों को रूसी हमले की आशंका

    यूरोपीय देश लंबे समय से रूसी हमले की आशंका जता रहे हैं। उन्हें डर है कि यूक्रेन को जीतने के बाद रूस दूसरे यूरोपीय देशों पर हमला कर सकता है। उनका कहना है कि रूस के निशाने पर नाटो सदस्य देश हैं, जिनकी सैन्य क्षमता काफी कम है। इस कारण ये देश तेजी से अपनी सैन्य शक्ति को बढ़ा रहे हैं और अपने नागरिकों को हर हालात से निपटने के लिए तैयार कर रहे हैं।

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