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  • 2032 में चंद्रमा से टकरा सकता है एस्टेरॉयड, पृथ्वी पर मंडराया खतरा, वैज्ञानिकों ने क्या चेतावनी दी

    बीजिंग: वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि दिसंबर 2032 में एक खतरनाक एस्टेरॉयड चांद से टकरा सकता है। इस एस्टेरॉयड के टकराने से मलबा धरती की ओर आ सकता है। इससे पृथ्वी की चारों ओर मौजूद सैटेलाइट्स के लिए खतरा पैदा हो सकता है। अगर ज्यादा बड़ी संख्या में मलबा आता है तो इससे न


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    By Azad Hind Desk जनवरी 28, 2026
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    बीजिंग: वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि दिसंबर 2032 में एक खतरनाक एस्टेरॉयड चांद से टकरा सकता है। इस एस्टेरॉयड के टकराने से मलबा धरती की ओर आ सकता है। इससे पृथ्वी की चारों ओर मौजूद सैटेलाइट्स के लिए खतरा पैदा हो सकता है। अगर ज्यादा बड़ी संख्या में मलबा आता है तो इससे न सिर्फ कम्युनिकेशन ठप पड़ सकता है, बल्कि मौसम, निगरानी और दूसरी कई तरह के ऑपरेशन प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में अंतरिक्ष वैज्ञानिक इस नए पहचाने गए एस्टेरॉयड पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।

    एस्टेरॉयड 2024 YR4 के चांद से टकराने का संभावना

    NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, एस्टेरॉयड 2024 YR4 लगभग 60 मीटर चौड़ा है। अभी 22 दिसंबर 2032 को चांद से टकराने की 4 प्रतिशत संभावना है। हालांकि संभावना कम है, लेकिन शोधकर्ताओं का कहना है कि इसका असर इतना शक्तिशाली होगा कि यह दुनिया भर का ध्यान खींचेगा। चीन की सिंघुआ यूनिवर्सिटी के एक रिसर्च पेपर में कहा गया है कि अगर यह टक्कर होती है तो इससे एक मध्यम आकार के थर्मोन्यूक्लियर धमाके (परमाणु बम विस्फोट) जितनी ऊर्जा निकलेगी, जिससे यह आधुनिक समय में देखा गया चांद पर सबसे शक्तिशाली प्रभाव होगा।

    एस्टेरॉयड की चांद से टक्कर से क्या होगा

    अगर एस्टेरॉयड टकराता है, तो उम्मीद है कि यह लगभग एक किलोमीटर चौड़ा गड्ढा बनाएगा। इससे चंद्रमा पर लगभग 5 मैग्नीट्यूड का भूकंप भी आएगा। इससे चांद की अंदरूनी संरचना के बारे में कीमती डेटा मिलेगा, जिसका सीधे अध्ययन करने में वैज्ञानिकों को मुश्किल हो रही है। इस धमाके से बड़ी मात्रा में मलबा अंतरिक्ष में भी फैल जाएगा। इस मलबे का कुछ हिस्सा कुछ दिनों बाद धरती पर गिर सकता है, जिससे नंगी आंखों से दिखने वाला एक तेज उल्कापिंडों का नजारा दिखेगा, खासकर दक्षिण अमेरिका, उत्तरी अफ्रीका और अरब प्रायद्वीप के कुछ हिस्सों में।

    सैटेलाइटों को हो सकता है नुकसान

    सिमुलेशन से पता चलता है कि अपने चरम पर, हर घंटे लाखों उल्कापिंड धरती के वायुमंडल में प्रवेश कर सकते हैं। हालांकि, इस घटना में गंभीर खतरे भी हैं। गिरने वाले मलबे से सैटलाइटों को नुकसान हो सकता है। इसमें अंतरिक्ष एजेंसियों को चेतावनी दी गई है कि टुकड़े सैटेलाइट्स के लिए खतरा बन सकते हैं, जिससे केसलर सिंड्रोम के नाम से जानी जाने वाली एक चेन रिएक्शन शुरू हो सकती है, जो वैश्विक संचार और नेविगेशन सिस्टम को बाधित कर सकती है।

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