लंबे समय से परेशान कर रहे लक्षण
मरीज को काफी समय से तेज सिरदर्द, सिर में भारीपन और पूरे शरीर में कमजोरी महसूस हो रही थी। जांच के दौरान डॉक्टरों ने अजीब स्थिति देखी। उन्होंने देखा कि उसकी गर्दन में नब्ज बहुत तेज महसूस हो रही थी लेकिन हाथ और पैरों की नब्ज पूरी तरह गायब थी। इससे यह साफ हुआ कि शरीर की मुख्य धमनी (एओर्टा) में गंभीर रुकावट है, जिसके कारण शरीर के निचले हिस्सों तक सही तरीके से खून नहीं पहुंच पा रहा था।
एडवांस जांच में सामने आई जटिलता
आधुनिक इमेजिंग जांच जैसे सीटी एंजियोग्राफी करने के बाद बीमारी की पुष्टि हुई। जांच में यह भी पता चला कि मरीज की रक्त वाहिकाओं की बनावट सामान्य नहीं थी और कई असामान्य कनेक्शन मौजूद थे। इस जटिल संरचना के कारण न तो सामान्य सर्जरी संभव थी और न ही कैथेटर के जरिए इलाज किया जा सकता था।
दुनिया में गिने-चुने मामलों में की जाने वाली सर्जरी
इन चुनौतियों को देखते हुए डॉक्टर शशांक त्रिपाठी और उनकी टीम ने एक बेहद रेयर बायपास सर्जरी करने का फैसला लिया। इस प्रोसेस में छाती से शरीर के निचले हिस्से तक खून पहुंचाने के लिए एक नया रास्ता बनाया गया। पेट के हिस्से में एक ग्राफ्ट लगाया गया, जिससे ब्लड फ्लो को बायपास कर सुरक्षित तरीके से नीचे के अंगों तक पहुंचाया गया। यह तकनीक दुनिया में बहुत कम मामलों में अपनाई गई है।
सर्जरी के बाद मिला बेहतर रिजल्ट
सर्जरी के बाद मरीज के हाथ और पैरों में सामान्य रूप से नब्ज महसूस होने लगी। ब्लड प्रेशर सामान्य हो गया और सिरदर्द, भारीपन व कमजोरी जैसे सभी लक्षण पूरी तरह खत्म हो गए। मरीज की रिकवरी बिना किसी जटिलता के हुई और उसे सर्जरी के चौथे दिन स्थिर हालत में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
दुर्लभ बीमारियों में भी उम्मीद की किरण
यह केस इस बात का बेहतरीन उदाहरण है कि सही समय पर की गई जांच, एडवांस सर्जिकल तकनीक और मरीज के अनुसार बनाई गई ट्रीटमेंट प्लानिंग से सबसे दुर्लभ और जटिल जन्मजात हृदय रोगों का भी सफल इलाज संभव है। यह सफलता न सिर्फ मरीज के लिए नई जिंदगी लेकर आई बल्कि मेडिकल साइंस में विशेषज्ञता और नवाचार की ताकत को भी दर्शाती है।














