ट्रंप के इस नए फरमान से भारत पर भी असर पड़ने की आशंका है। भारत पहले से ही अमेरिका को अपने निर्यात पर 50% टैरिफ झेल रहा है। इसमें से 25% रेसिप्रोकल टैरिफ हैं, जो एक तरह का बदला है। बाकी 25% टैरिफ भारत द्वारा रूस से कच्चा तेल खरीदने के कारण लगाया गया एक दंड है। ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि जो देश रूस से व्यापार जारी रखेंगे, उन पर 500% तक टैरिफ लगाया जा सकता है।
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भारत पर कैसे लग सकता है 575% टैरिफ?
ट्रंप के फरमानों के मुताबिक अमेरिका के साथ व्यापार करने पर भारत को 575 फीसदी टैरिफ देना पड़ सकता है। चूंकि अभी भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगा हुआ है। भारत अगर रूस से व्यापार जारी रखता है तो अमेरिका भारत पर 500 फीसदी टैरिफ लगा सकता है। चूंकि भारत और ईरान के बीच भी कारोबार है। ऐसे में भारत पर ट्रंप ईरान के साथ व्यापार को लेकर 25 फीसदी लगा सकते हैं। इस प्रकार भारत पर कुल 575 फीसदी टैरिफ लग सकता है।
भारत ईरान के बीच व्यापारिक रिश्ते कैसे
भारत और ईरान के बीच व्यापारिक रिश्ते काफी पुराने और महत्वपूर्ण हैं। भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के अनुसार भारत हाल के वर्षों में ईरान के शीर्ष पांच व्यापारिक भागीदारों में से एक रहा है। भारत ईरान को चावल, चाय, चीनी, दवाइयां, कृत्रिम रेशे, बिजली की मशीनें और नकली गहने जैसी चीजें निर्यात करता है। वहीं, ईरान से भारत सूखे मेवे, अकार्बनिक/कार्बनिक रसायन और कांच के सामान जैसी चीजें आयात करता है।
कितना हुआ आयात-निर्यात?
- अक्टूबर 2025 में भारत ने ईरान को 56.1 मिलियन डॉलर का निर्यात किया और 28.3 मिलियन डॉलर का आयात किया। इससे भारत को 27.9 मिलियन डॉलर का व्यापारिक लाभ हुआ।
- अक्टूबर 2024 से अक्टूबर 2025 के बीच भारत का ईरान को निर्यात 22.9 मिलियन डॉलर (29%) घटकर 79.1 मिलियन डॉलर से 56.1 मिलियन डॉलर हो गया।
- आयात 7.38 मिलियन डॉलर (20.7%) घटकर 35.6 मिलियन डॉलर से 28.3 मिलियन डॉलर हो गया।
- अक्टूबर 2025 में भारत के ईरान को निर्यात में आई गिरावट की मुख्य वजह बासमती चावल का निर्यात कम होना रहा। बासमती चावल के निर्यात में 26.6 मिलियन डॉलर (54.6%) की कमी आई।
- कांच और कांच के सामान के निर्यात में 2.77 मिलियन डॉलर (93.1%) और अन्य इंजीनियरिंग सामानों के निर्यात में 925 हजार डॉलर (88.2%) की कमी देखी गई।
चाबहार बंदरगाह का महत्व
व्यापार और रणनीतिक दृष्टिकोण से भारत के लिए ईरान का चाबहार बंदरगाह बहुत महत्वपूर्ण है। पिछले साल अमेरिका ने चाबहार बंदरगाह के लिए ईरान पर लगे प्रतिबंधों में छह महीने की छूट को अप्रैल तक बढ़ा दिया था। इससे पहले, सितंबर 2025 में अमेरिका ने यह छूट रद्द कर दी थी। यह छूट 2018 से लागू थी और इसी के तहत भारत चाबहार बंदरगाह को अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंचने के रास्ते के तौर पर विकसित कर रहा था। इससे भारत पाकिस्तान के रास्ते से बचकर ईरान के जरिए इन देशों तक पहुंच बना सकता था। यह ईरान पर दबाव बनाने की अमेरिकी रणनीति का भी हिस्सा था।
अगर यह छूट फिर से रद्द हो जाती है, तो चाबहार बंदरगाह को चलाने वाली या उससे जुड़ी गतिविधियों में शामिल कंपनियां अमेरिका के ‘ईरान फ्रीडम एंड काउंटर-प्रोलिफरेशन एक्ट’ के तहत दंड की भागी बन सकती हैं। अफगानिस्तान के साथ भारत के बढ़ते संबंधों के लिए चाबहार बंदरगाह का रणनीतिक महत्व और भी बढ़ गया है, खासकर जब से काबुल में तालिबान प्रशासन के साथ भारत का संपर्क धीरे-धीरे बेहतर हो रहा है।













