डीएलआई योजना के तहत चयनित 24 चिप डिजाइन कंपनियों के साथ बैठक के बाद मंत्री ने कहा, ‘2032 तक हमारा लक्ष्य 3-नैनोमीटर चिप के डिजाइन और विनिर्माण के स्तर तक पहुंचना है। डिजाइन का काम तो हम आज भी कर रहे हैं, लेकिन विनिर्माण के स्तर पर 3-नैनोमीटर तक पहुंचना होगा।’ वैष्णव ने कहा कि सरकार छह प्रमुख प्रणालियों पर ध्यान देना चाहती है, ताकि देश के पूरे सेमीकंडक्टर डिजाइन क्षेत्र समग्र और व्यापक रूप से विकसित किया जा सके।
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कहां आएगी काम?
मंत्री ने कहा, ‘कंप्यूट, आरएफ, नेटवर्किंग, ऊर्जा, सेंसर और मेमोरी इन छह प्रमुख श्रेणियों में हम शिक्षा जगत और उद्योग को नए विचार, नई सोच और नए समाधान लेकर आने के लिए प्रोत्साहित करेंगे। जैसे-जैसे हम 2029 की ओर बढ़ेंगे, देश में ऐसे चिप के डिजाइन और विनिर्माण की बड़ी क्षमता विकसित हो जाएगी, जिनकी जरूरत हमारे देश में लगभग 70–75 प्रतिशत अनुप्रयोगों में होती है।’ उन्होंने कहा कि हर क्षेत्र को इन छह प्रकार के चिप के किसी न किसी संयोजन की आवश्यकता होगी।













