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  • 3 साल से एक ही जगह पर अटकी है चीन की गाड़ी, अमेरिका रफ्तार के साथ निकल चुका है काफी आगे

    नई दिल्ली: अमेरिका और चीन दुनिया की दो बड़ी आर्थिक महाशक्तियां हैं और दोनों के बीच कई साल से ट्रेड वॉर चल रहा है। चीन की लाख कोशिशों के बाद भी वह डॉलर का बाल भी बांका नहीं कर पाया है। बल्कि हाल के वर्षों में यह और मजबूत होकर उभरा है। ग्लोबल ट्रांजैक्शंस ने


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    By Azad Hind Desk फरवरी 16, 2026
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    नई दिल्ली: अमेरिका और चीन दुनिया की दो बड़ी आर्थिक महाशक्तियां हैं और दोनों के बीच कई साल से ट्रेड वॉर चल रहा है। चीन की लाख कोशिशों के बाद भी वह डॉलर का बाल भी बांका नहीं कर पाया है। बल्कि हाल के वर्षों में यह और मजबूत होकर उभरा है। ग्लोबल ट्रांजैक्शंस ने यूएस डॉलर लगातार मजबूत बना हुआ है। स्विफ्ट के जरिए होने वाले अंतरराष्ट्रीय लेनदेन में डॉलर की हिस्सेदारी बढ़कर 50.5% पहुंच गई है जो 2023 के बाद सबसे ज्यादा है। पिछले चार साल में इसमें 11.6% तेजी आई है। मतलब दुनिया में जितना जितना भी लेनदेन होता है, उसमें करीब आधा डॉलर में होता है।

    यूरोप की करेंसी यूरो ग्लोबल ट्रांजैक्शंस में दूसरे नंबर पर है। दुनिया में होने वाले कुल लेनदेन का 21.9% यूरो में होता है। इसके बाद ब्रिटिश पाउंड का नंबर है जिसकी ग्लोबल ट्रांजैक्शंस में हिस्सेदारी 6.7% है। कनाडाई डॉलर और जापानी येन की हिस्सेदारी एक बराबर 3.4% है। दुनिया में होने वाले कुल लेनदेन में चीनी युआन की हिस्सेदारी 2.7% है। दिलचस्प बात है कि पिछले तीन साल से चीनी करेंसी की हैसियत में कोई भी बदलाव नहीं हुआ है जबकि पिछले साल चीन का ट्रेड सरप्लस 1 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा रहा था। यानी दुनिया के देश अब भी चीनी युआन में लेनदेन के लिए तैयार नहीं हैं।

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    डॉलर वर्सेज गोल्ड

    हालांकि दुनिया भर के देशों के फॉरेक्स रिजर्व में डॉलर की हिस्सेदारी में हाल में गिरावट आई है। ग्लोबल फॉरेक्स रिजर्व में डॉलर की हिस्सेदारी गिरकर 40% रह गई है जो 20 साल में सबसे कम है। पिछले 10 साल में इसमें 18% गिरावट आई है। इस दौरान सोने की हिस्सेदारी में 12% बढ़कर 28% पहुंच गई है जो 1990 के दशक की शुरुआत के बाद सबसे ज्यादा है।

    यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद अमेरिका और पश्चिमी देशों ने विदेशों में जमा रूसी एसेट्स को फ्रीज कर दिया था। इस कारण है कि दुनिया के कई देश डॉलर पर अपनी निर्भरता कम कर रहे हैं और सोने का भंडार बढ़ा रहे हैं। आज ग्लोबल फॉरेक्स रिजर्व में सोने की हिस्सेदारी यूरो, येन और पाउंड की कंबाइंड हिस्सेदारी से ज्यादा है।

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