जीडीपी डिफ्लेटर में लगातार 11वीं तिमाही में गिरावट आई है। यह कम से कम 30 साल में डिफ्लेशन का सबसे लंबा सिलसिला है। 2008 के वित्तीय संकट के दौरान देश में डिफ्लेशन की स्थिति केवल दो तिमाही तक रही थी। जनवरी में देश में प्रोड्यूसर प्राइस में 1.4 फीसदी गिरावट आई। इस तरह देश में फैक्ट्री इनफ्लेशन में लगातार 40वें महीने गिरावट रही है। देश में प्रॉपर्टी मार्केट संकट के कारण कंज्यूमर डिमांड पहले से ही काफी कमजोर है। कई जानकारों का कहना है कि चीन मंदी में फंस चुका है।
अमेरिका से चुपचाप अपना पैसा निकाल रहा चीन, कहां कर रहा निवेश, क्या है ड्रैगन का प्लान?
दुनिया के लिए चिंताजनक
चीन में डिफ्लेशन के लंबे समय तक बने रहने की आशंका है। आमतौर पर जब इकॉनमी में फंड की सप्लाई और क्रेडिट में गिरावट होती है तो डिफ्लेशन की स्थिति पैदा होती है। इससे चीन की इकॉनमी में जापान की तरह ठहराव आने की आशंका जताई जा रही है। जापान की इकॉनमी एक जमाने में रॉकेट की रफ्तार से बढ़ रही थी और माना जा रहा था कि वह अमेरिका को पीछे छोड़ देगा। लेकिन डिफ्लेशन के कारण 1990 के दशक में जापान की इकॉनमी में ठहराव आ गया था। यही वजह है कि चीन में डिफ्लेशन पूरी दुनिया के लिए चिंताजनक है क्योंकि वह पिछले कई दशक से ग्लोबल इकॉनमी का इंजन बना हुआ है।













