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  • 34 साल में पहली बार हुआ ऐसा, एक महीने में 95% बढ़ गया अमेरिका का व्यापार घाटा

    नई दिल्ली: अमेरिका के टैरिफ ने पूरी दुनिया को परेशान कर रखा है। लेकिन अमेरिका को भी इसकी कीमत चुकानी पड़ रही है। नवंबर में अमेरिका का गुड्स ट्रेड डेफिसिट 27.6 अरब डॉलर यानी 95% बढ़कर 56.8 अरब डॉलर पहुंच गया। यह 1992 के बाद ट्रेड डेफिसिट में एक महीने में सबसे बड़ी उछाल है।


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    By Azad Hind Desk जनवरी 31, 2026
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    नई दिल्ली: अमेरिका के टैरिफ ने पूरी दुनिया को परेशान कर रखा है। लेकिन अमेरिका को भी इसकी कीमत चुकानी पड़ रही है। नवंबर में अमेरिका का गुड्स ट्रेड डेफिसिट 27.6 अरब डॉलर यानी 95% बढ़कर 56.8 अरब डॉलर पहुंच गया। यह 1992 के बाद ट्रेड डेफिसिट में एक महीने में सबसे बड़ी उछाल है। इस दौरान अमेरिका से एक्सपोर्ट होने वाले गुड्स और सर्विसेज की वैल्यू 10.9 अरब डॉलर घटकर 292.1 अरब डॉलर रह गई जो सितंबर के बाद सबसे कम है।

    नवंबर में अमेरिका का निर्यात 16.8 अरब डॉलर बढ़कर 332.1 अरब डॉलर पहुंच गया जो जुलाई के बाद सबसे अधिक है। खासकर दवाओं के आयात में तेजी और सोने के एक्सपोर्ट में गिरावट के कारण हुआ। सोने की कीमत में हाल में काफी तेजी आई है जिससे इसका एक्सपोर्ट गिरा है। हालांकि मार्च, 2025 से अमेरिका का ट्रेड गुड्स डेफिसिट 79.6 अरब डॉलर यानी करीब 58% सुधरा है। ट्रेड डेफिसिट बढ़ने का मतलब है कि अमेरिका बाकी देशों से ज्यादा सामान खरीद रहा है और उन्हें कम सामान बेच रहा है।

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    अमेरिका-चीन ट्रेड

    दरअसल टैरिफ में बदलाव की आशंका के कारण नवंबर में अमेरिका की कंपनियों ने खासकर दवाओं का ज्यादा आयात किया। इस दौरान कैपिटल गुड्स के आयात में भी तेजी रही। अगले महीने जब सालाना डेटा रिलीज होगा तो तीन दशक में पहली बार मेक्सिको अमेरिकी सामान का सबसे बड़ा खरीदार होगा। पिछले साल से कनाडा पहले नंबर पर था। पिछले दो दशक में यह पहला मौका होगा जब चीन के साथ अमेरिका का कुल ट्रेड उसके कुल व्यापार से 10 फीसदी से भी नीचे चला जाएगा।

    साल 2017 में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में चीन के साथ ट्रेड वॉर शुरू किया था तो अमेरिका के कुल ट्रेड में चीन की हिस्सेदारी 16.38 फीसदी थी। लेकिन नवंबर में यह 6.29 फीसदी रह गया। अमेरिका के टॉप ट्रेडिंग पार्टनर्स में ईयू पहले नंबर पर है। उसके बाद मेक्सिको, कनाडा, चीन, ताइवान, जापान, वियतनाम, साउथ कोरिया, स्विट्जरलैंड और भारत का नंबर है।

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