जब्त की गई घड़ियों में Seiko, Citizen और Ricoh जैसी विदेशी कंपनियों के ब्रांड शामिल थे। इस केस की सुनवाई भुज ट्रायल कोर्ट ने 18 साल, एक एडिशनल सेशन कोर्ट ने दो साल, गुजरात हाई कोर्ट ने 5 साल और आखिर में SC ने 15 साल तक की।
कोर्ट ने किस आधार पर आरोपियों नहीं भेजा जेल?
कोर्ट ने कहा, ‘इस केस के बैकग्राउंड में सभी हालात को देखते हुए जिसमें यह बात भी शामिल है कि घटना लगभग चार दशक पुरानी है, अपील करने वाले पहले ही जेल में रह चुके हैं, केस लंबे समय से पेंडिंग है, और बचे हुए अपील करने वालों की ज्यादा उम्र है, हमारा मानना है कि अपील करने वालों को इस समय और जेल में रहने का आदेश देना बहुत ज्यादा सख्त होगा और इससे इंसाफ नहीं होगा’।
- कोर्ट ने गुजरात हाई कोर्ट के उनके दोषी ठहराए जाने के आदेश को बरकरार रखा, लेकिन हाई कोर्ट की ओर से दी गई तीन साल की जेल की सजा को घटाकर पहले ही काटी जा चुकी जेल की सजा कर दिया। कोर्ट ने कहा, ‘मौजूदा मामले के खास तथ्यों और हालात को देखते हुए अपील करने वालों की सज़ा को घटाकर उतना ही किया जाए जितना वे पहले काट चुके हैं।’
- मुकदमे में 18 साल लगे और आरोपियों को 2003 में दोषी ठहराया गया। उसके सात साल बाद हाई कोर्ट ने उनकी अपील खारिज कर दी और उनकी सजा और तीन साल की जेल की सजा को बरकरार रखा। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, जिसने 14 फरवरी, 2011 को पहली सुनवाई की थी और मामले का फैसला करने में 15 साल लगे।
स्मगलिंग केस में क्या बोला सुप्रीम कोर्ट?
SC ने कहा, ‘पूरे मामले पर विचार करने के बाद, हम हाई कोर्ट की बातों से सहमत हैं। ट्रायल कोर्ट की ओर से दर्ज किए गए दोष के नतीजे, जिन्हें अपील कोर्ट और HC ने एक साथ कन्फर्म किया है, उनमें कोई गलत काम, गैर-कानूनी या साफ गलती नहीं है, जिसके लिए इस कोर्ट को संविधान के आर्टिकल 136 के तहत अपने अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करते हुए दखल देना चाहिए।’














