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  • 50 से 500% तक टैरिफ… रूस की नकेल कसने चला अमेरिका, लेकिन भारत कैसे फंस गया? जानें बिल की बात

    नई दिल्ली: अमेरिका में एक नया कानून बनने वाला है, जो रूस से सस्ता तेल खरीदने वाले देशों पर भारी जुर्माना लगाएगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस बिल को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। लेकिन इस बिल से भारत की चिंता बढ़ गई है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह कानून भारत को मुख्य तौर


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    By Azad Hind Desk जनवरी 8, 2026
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    नई दिल्ली: अमेरिका में एक नया कानून बनने वाला है, जो रूस से सस्ता तेल खरीदने वाले देशों पर भारी जुर्माना लगाएगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस बिल को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। लेकिन इस बिल से भारत की चिंता बढ़ गई है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह कानून भारत को मुख्य तौर पर निशाना बना सकता है, जबकि चीन पर इसका ज्यादा असर नहीं पड़ेगा।

    यह बिल सीनेटर लिंडसे ग्राहम लेकर आए हैं। इसके तहत जो भी देश रूस से सस्ता तेल खरीदेंगे, उन पर अमेरिका 500% तक का टैक्स लगा सकता है। सीनेटर ग्राहम ने कहा, ‘यह बिल राष्ट्रपति ट्रंप को उन देशों को सजा देने की ताकत देगा जो रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की युद्ध मशीन को बढ़ावा देने के लिए सस्ता रूसी तेल खरीद रहे हैं।’ उन्होंने यह भी कहा कि इससे ट्रंप को भारत, चीन और ब्राजील पर ‘बहुत बड़ा दबाव’ बनाने का मौका मिलेगा।
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    …तो 500% हो जाएगा टैरिफ

    अगस्त 2025 में ट्रंप ने भारतीय सामानों पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की थी। उन्होंने इसे भारत द्वारा रूसी तेल खरीदने की ‘सजा’ बताया था। इससे भारत पर टैरिफ 50% हो गया है। अगर भारत ने रूस से तेल खरीदना पूरी तरह बंद नहीं किया तो इस बिल के पास होने के बाद भारत पर टैरिफ 50 फीसदी से बढ़कर 500 फीसदी हो जाएगा।

    यह नया बिल क्या कहता है?

    इस बिल का नाम Sanctioning Russia Act of 2025 है। इस कानून के तहत किसी व्यक्ति या देश पर पाबंदियां लगाने के लिए चार शर्तें बताई गई हैं। ये शर्तें इस प्रकार हैं:

    • यूक्रेन के साथ शांति समझौता करने से इनकार करना।
    • किसी तय किए गए शांति समझौते का उल्लंघन करना।
    • यूक्रेन पर एक और हमला शुरू करना।
    • यूक्रेनी सरकार को उखाड़ फेंकना, भंग करना या उसे कमजोर करने की कोशिश करना।

    अगर इन शर्तों के तहत किसी पर आरोप लगते हैं, तो अमेरिकी अधिकारी सामानों पर 500% का टैक्स लगा सकेंगे। इसके अलावा वीजा बैन दूसरे उपायों से सेवाओं पर भी इसका असर पड़ सकता है।

    भारत कैसे फंसा?

    यह बिल रूस को अलग-थलग करने की अमेरिकी रणनीति का हिस्सा है। अमेरिका चाहता है कि रूस यूक्रेन युद्ध को रोके और शांति स्थापित करे। पाबंदियां इसी दबाव का एक तरीका हैं। लेकिन, इस तरह की पाबंदियों का असर सिर्फ रूस पर ही नहीं, बल्कि उन देशों पर भी पड़ता है जो रूस के साथ व्यापार करते हैं। भारत भी इन्हीं देशों में शामिल है। भारत रूस से काफी मात्रा में कच्चा तेल खरीद रहा है। ऐसे में रूस पर बैन लगाने के चक्कर में भारत भी फंस गया है।

    क्या पड़ेगा भारत पर असर?

    यह बिल भारत के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर सकता है। भारत का अमेरिका को सालाना निर्यात 120 अरब डॉलर से ज्यादा है। यह नया टैक्स भारत के निर्यात को लगभग पूरी तरह से रोक सकता है। जीटीआरआई की रिपोर्ट में कहा गया है कि 500% का टैक्स भारत के सामानों और सेवाओं के अमेरिका को निर्यात को प्रभावी ढंग से बंद कर देगा।

    वहीं दूसरी ओर भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए रूस से तेल खरीद रहा है, क्योंकि यह सस्ता और आसानी से उपलब्ध है। खासकर जब दुनिया भर में तेल की कीमतें बढ़ रही हैं, तो भारत के लिए यह एक महत्वपूर्ण विकल्प है। अगर यह बिल लागू होता है तो भारत को या तो रूसी तेल खरीदना बंद करना होगा या फिर अमेरिका को बहुत ज्यादा टैरिफ देना होगा। इससे देश की अर्थव्यवस्था पर बोझ बढ़ सकता है।

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