सीबीआई को भी दिया निर्देश
इस तरह के अपराध या तो बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से या उनकी लापरवाही के कारण हो सकते हैं, ऐसा कहते हुए कोर्ट ने RBI और बैंकों की ओर से समय पर कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने सीबीआई को ‘डिजिटल अरेस्ट’ के मामलों की पहचान करने का निर्देश दिया।
‘ऐसा मैकेनिजम बनाएं बैंक, जिससे कस्टमर अलर्ट हों’
सरकारों से कहा कि वह डिजिटल अरेस्ट के मामलों में जांच के लिए सीबीआई को जरूरी मंजूरी दें। कोर्ट ने ये भी कहा कि साइबर फ्रॉड को रोकने में बैंकों को एक सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि बैंकों की यह जिम्मेदारी है कि वे ऐसा मैकेनिजम डिवेलप करें, जिससे ‘डिजिटल अरेस्ट घोटालों’ के तहत ठगे जाने पर बड़े पैमाने पर हो रहे लेन-देन को रोकने के लिए कस्टमर को अलर्ट किया जा सके। चीफ जस्टिस ने कहा कि हमें उम्मीद है कि आप (सरकार) हमें निर्देश जारी करने के लिए विवश नहीं करेंगे। यदि RBI कोई तंत्र विकसित कर सकता है।













