किसे हासिल हुई यह कामयाबी?
यह कामयाबी कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी, UC Irvine के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरों को मिली है। पेम हेदारी और उनकी टीम वायरलैस चिप बनाने में साल 2020 से काम कर रहे थे। हेदारी UC Irvine में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग और कंप्यूटर साइंस के प्रोफेसर हैं। रिपोर्ट के अनुसार, रिसर्च टीम को यह पता था कि मौजूदा वायरलैस चिप एक वक्त के बाद काम करना बंद कर देंगी, क्योंकि वो बहुत हाईस्पीड डेटा ट्रांसमिट नहीं कर सकतीं।
कैसे हासिल हुई उपलब्धि?
गौरतलब है कि जब भी वायरलैस स्पीड में बढ़ोतरी होती है, डेटा को प्रोसेस करने में लगने वाली एनर्जी भी बढ़ती है। अगर आज की तकनीक को ही भविष्य के ट्रांसमीटरों के लिए इस्तेमाल किया जाए तो रिसर्चर्स को बहुत बड़ी बैटरी बनानी होगी या मौजूदा बैटरी फौरन डिस्चार्ज हो जाएगी। पेम हेदारी और उनकी टीम को पता था कि किसी भी चिप को बनाने में जो सर्किट इस्तेमाल होता है, उसे भविष्य के लिए पूरी तरह से बदलना होगा।
रिसर्चर्स ने क्या बड़ा किया?
मौजूदा वायरलैस चिप के ट्रांसमीटर, डिजिटल टु एनालॉग कन्वर्टर का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन 6G के लिए यह काफी नहीं है। 6G के लिए ट्रांसमीटरों को 100 गीगाहर्त्ज से अधिक फ्रीक्वेंसी पर काम करना होगा। रिसर्चर्स इसे DAC ब्लॉक कहते हैं। पेम हेदारी की टीम ने DAC को खत्म कर दिया और सीधे रेडियो-फ्रीक्वेंसी में सिग्नल बनाना शुरू किया। इससे जो चिप बनी वह बिना गर्म हुए फास्ट और अधिक डेटा को एक जगह से दूसरी जगह भेज सकती है। रिसर्चर्स ने स्मार्ट रिसीवर भी बनाया है ताकि स्मार्टफोन जैसी डिवाइसेज को फास्ट डेटा भेजने में सक्षम बनाया जा सके और 6G जैसी तकनीक के लिए वो तैयार हो सकें। हेदारी और उनकी टीम ने जिस चिप को तैयार किया है, वह बहुत कम बिजली खाती है और भविष्य में बड़े पैमाने पर तैयार किए जाने के लिए भी आइडियल है।














