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  • 6Ghz बैंड पर बड़ा फैसला: भारत के घरों में बढ़ेगी इंटरनेट स्‍पीड और बिकेंगे WiFi 7 राउटर, ये कैसे हुआ संभव?

    6Ghz स्‍पेक्‍ट्रम बैंड को लेकर बड़ा फैसला हो गया है। भारत सरकार ने इस बैंड के निचले हिस्से (5925-6425 मेगाहर्ट्ज) को बिना लाइसेंस के इस्तेमाल करने की मंजूरी दे दी है। इसका सबसे बड़ा फायदा आम भरतीयों को होगा क्‍योंकि उन्‍हें अब वाई-फाई 6ई और वाई-फाई 7 जैसी हाईस्‍पीड इंटरनेट तकनीकों का फायदा मिलेगा। ईटी


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    By Azad Hind Desk जनवरी 21, 2026
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    6Ghz स्‍पेक्‍ट्रम बैंड को लेकर बड़ा फैसला हो गया है। भारत सरकार ने इस बैंड के निचले हिस्से (5925-6425 मेगाहर्ट्ज) को बिना लाइसेंस के इस्तेमाल करने की मंजूरी दे दी है। इसका सबसे बड़ा फायदा आम भरतीयों को होगा क्‍योंकि उन्‍हें अब वाई-फाई 6ई और वाई-फाई 7 जैसी हाईस्‍पीड इंटरनेट तकनीकों का फायदा मिलेगा। ईटी टेलिकॉम की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय मंत्री ज्‍योत‍िराद‍ित्‍य सिंधिया ने बुधवार शाम इस फैसले पर मुहर लगा दी। इससे घरों में वाई-फाई अब और तेज हो जाएंगे।

    लंबे वक्‍त से टेलिकॉम कंपनियों और टेक्‍नोलॉजी कंपनियों में इसको लेकर खींचतान चल रही थी। दोनों पक्ष यानी जियो-एयरटेल जैसी कंपनियां और टेक कंपनियां इस स्‍पेक्‍ट्रम को अपने लिए इस्‍तेमाल करना चाहते थे। आखिरकार सरकार ने किसी एक पक्ष की तरफ ना झुकते हुए इसे बिना लाइसेंस के इस्‍तेमाल करने की मंजूरी दे दी है।

    भारत और आम लोगों को क्‍या फायदा?

    6 गीगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम के इस्‍तेमाल को मंजूरी देने से देश की डिजिटल जरूरतें स्‍पीड के साथ पूरी होंगी। अब बाजार में वाई-फाई 6E और वाई-फाई 7 कनेक्‍ट‍िविटी को सपोर्ट करने वाले राउटर्स उतारे जा सकेंगे। जब ये राउटरों घरों में इस्‍तेमाल किए जाएंगे तो इंटरनेट स्‍पीड में सुधार होगा। इसके अलावा, मोबाइल डेटा पर लोगों का खर्च घट सकता है और जिस स्‍पेक्‍ट्रम को लाइसेंस के तहत आवंटित किया गया है, उसे अन्‍य कामों में उपयोग किया जा सकेगा।

    सवाल: वाई-फाई 6E और वाई-फाई 7 राउटर लगाने से मुझे क्‍या फायदा?

    जवाब: एक्‍सपर्ट्स का कहना है कि वाई-फाई 6E और वाई-फाई 7 राउटर लगाने से घरों में इंटरनेट स्‍पीड- डाउनलो‍ड और अपलोड दोनों बढ़ेंगी। अब ऑनलाइन गेमिंग से लेकर, वीड‍ियाे स्‍ट्रीमिंग और वीड‍ियो कॉन्‍फ्रेंस जैसे काम बिना लैग और हैंग किए जा सकेंगे।

    टेलिकॉम कंपनियों और टेक कंपनियों में क्‍या थी खींचतान

    6 गीगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम के इस्‍तेमाल को लेकर टेलिकॉम कंपनियों और टेक कंपनियों में लंबे वक्‍त से खींचतान चल रही थी। टेलिकॉम कंपनियां इस स्‍पेक्‍ट्रम का इस्‍तेमाल करके 5जी नेटवर्क को बढ़ाना चाहती थीं, जबकि टेक्‍नोलॉजी कंपनियां इस स्‍पेक्‍ट्रम के जरिए घरों में वाईफाई स्‍पीड काे बढ़ाने का तर्क दे रही थीं।

    पिछले साल मई में दूरसंचार विभाग ने 6 गीगाहर्ट्ज बैंड के 500 मेगाहर्ट्ज हिस्से (5925-6425 मेगाहर्ट्ज) को बिना लाइसेंस वाले इनडोर वाई-फाई उपयोग के लिए खोलने का प्रस्ताव दिया था। तब टेलीकॉम कंपनियों ने इसका विरोध किया था। अब दोनों ही तकनीकों में इसे इस्‍तेमाल किया जा सकेगा यानी 5जी नेटवर्क भी अपग्रेड होगा और घरों में इंटरनेट वाईफाई की स्‍पीड भी बढ़ाई जा सकेगी।

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