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  • 7 साल में पहली बार ऐपल से आगे निकली यह कंपनी, भारतीय मूल के सुंदर पिचाई के हाथ में है कमान

    नई दिल्ली: टेक कंपनियों की वैल्यूएशन में बड़ा फेरबदल हुआ है। गूगल की पैरेंट कंपनी अल्फाबेट इंक अब दुनिया की दूसरी बड़ी वैल्यूएबल कंपनी बन गई है। उसके आईफोन बनाने वाली कंपनी ऐपल को पछाड़कर यह मुकाम हासिल किया है। साल 2019 के बाद यह पहला मौका है जब अल्फाबेट ने ऐपल को पीछे छोड़ा


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    By Azad Hind Desk जनवरी 8, 2026
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    नई दिल्ली: टेक कंपनियों की वैल्यूएशन में बड़ा फेरबदल हुआ है। गूगल की पैरेंट कंपनी अल्फाबेट इंक अब दुनिया की दूसरी बड़ी वैल्यूएबल कंपनी बन गई है। उसके आईफोन बनाने वाली कंपनी ऐपल को पछाड़कर यह मुकाम हासिल किया है। साल 2019 के बाद यह पहला मौका है जब अल्फाबेट ने ऐपल को पीछे छोड़ा है। अल्फाबेट का मार्केट कैप अब 3.892 ट्रिलियन डॉलर पहुंच गया है जबकि ऐपल की वैल्यू 3.863 ट्रिलियन डॉलर रह गई है। एनवीडिया 4.604 ट्रिलियन डॉलर के साथ पहले नंबर पर बनी हुई है।

    अल्फाबेट का शेयर बुधवार को 2.51 फीसदी तेजी के साथ 322.43 डॉलर पर बंद हुआ। पिछले एक साल में इस शेयर ने 64.73% का रिटर्न दिया है। दूसरी ओर ऐपल का शेयर 0.77 फीसदी गिरावट के साथ 260.33 डॉलर पर बंद हुआ। पिछले 1 साल में इसके शेयर में सिर्फ 7.49% का ही इजाफा हुआ है। वहीं पहले नंबर पर मौजूद एनवीडिया के शेयरों में पिछले एक साल में 25.32% तेजी आई है।

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    क्यों बढ़ रहा शेयर?

    अल्फाबेट की मार्केट वैल्यू में उछाल उसके जनरेटिव AI प्लेटफॉर्म Gemini के बढ़ते इस्तेमाल की वजह से आया है। इसके अलावा अल्फाबेट के पास Waymo भी है। यह अमेरिका में रोबोटैक्सी मार्केट का एक प्रमुख खिलाड़ी है। Waymo पहले से ही फीनिक्स, सैन फ्रांसिस्को बे एरिया, लॉस एंजेलिस, अटलांटा और ऑस्टिन जैसे शहरों में आम लोगों के लिए कमर्शियल रोबोटैक्सी सेवाएं चला रहा है।

    भारतीय मूल के सुंदर पिचाई अल्फाबेट के सीईओ हैं। आईआईटी खडगपुर से इंजीनियरिंग करने के बाद सुंदर पिचाई ने आगे की पढ़ाई अमेरिका के स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय से की थी। उन्होंने मटेरियल इंजीनियर के रूप में अपना करियर शुरू किया और साल 2004 में एक मैनेजमेंट एक्जीक्यूटिव के रूप में गूगल में शामिल हो गए। साल 2015 में गूगल के को-फाउंडर लैरी पेज ने उन्हें गूगल का CEO बनाया था और साल 2019 में उन्हे अल्फाबेट के सीईओ की पोस्ट भी मिल गई।

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