boAT के शुरुआती दिनों को याद करते हुए अमन ने कहा, ‘जब हमें वारबर्ग से फंडिंग मिली, तो मैं बहुत खुश हो गया। मैं सोच रहा था, ‘वाह, पैसे आ गए, मजे आ गए,’ क्योंकि मैंने अपने जीवन में इतना पैसा कभी नहीं देखा था। मेरी मां एक टीचर थीं और मेरे पिता एक सेल्समैन थे। हमने कभी पैसा नहीं देखा था। मेरा पालन-पोषण मिडिल क्लास फैमिली में हुआ था। धीरे-धीरे, जब हमें इतना पैसा मिलने लगा, तो मैं बार-बार अपना बैंक खाता चेक करता था। इतना ज्यादा था कि हमारा बैंकर हमारा हालचाल जानने के लिए घर आ गया।’
बचपन मुश्किल में बीता
अपने बचपन को याद करते हुए अमन ने कहा, ‘मेरा बचपन बहुत मजेदार था। मैं एक भटका हुआ इंसान था। मेरा कोई क्लियर गोल नहीं था और मैं अक्सर अपने दोस्तों की नकल करता था। मैंने अपने पिता के कहने पर ही कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी की पढ़ाई की। हम एक छोटे से परिवार में रहते थे, जहां हर परिवार के पास एक कमरा होता था। हमने उतार-चढ़ाव देखे। मेरे पिता ने एक बिजनेस शुरू किया, नुकसान उठाया, फिर उसे संभाला। मेरी मां लंबे समय तक बीमार रहीं। हमारा घर सामान्य था। दो साल पहले तक हम सब साथ रहते थे। अब हम नए घर में चले गए हैं, लेकिन मैं और मेरे माता-पिता अक्सर एक-दूसरे से मिलते रहते हैं।’
40 साल की उम्र में पत्नी चलाती थीं खर्च
अमन ने इससे पहले ‘प्रकाशक के प्रवचन’ में कहा था, ‘मैंने बहुत मेहनत की। मैं हर दिन बसों से सफर करता था और पहले स्टॉप पर ही चढ़ जाता था क्योंकि वो खाली होती थीं। मैं जानबूझकर पहले स्टॉप तक जाता था, सिर्फ इसलिए कि मुझे सीट मिल जाए और मैं दो घंटे सो सकूं या पढ़ाई कर सकूं। मैंने बहुत मेहनत की है। मैंने दिन में 16 घंटे काम किया है, मैंने नौकरियां बदली हैं। मेरे सभी दोस्त बहुत अच्छा कर रहे थे। 40 साल की उम्र तक मेरी रोजी-रोटी मेरी पत्नी पर निर्भर थी। मैंने रात-दिन मेहनत की है।’
अमन गुप्ता के 5 स्टार्टअप फेल हुए
boAT की स्थापना से पहले, अमन ने लगभग पांच स्टार्टअप शुरू करने की कोशिश की थी, जिनमें से सभी असफल रहे। boAT उनका छठा बिजनेस था और इसे सफल होने में कई साल लगे। इस सफर में, वो अपनी पत्नी प्रिया को इमोशनल और फाइनेंशियल सपोर्ट देने के लिए धन्यवाद देते हैं।















