राजेंद्र चावला ने 1998 में अपना एक्टिंग करियर शुरू किया था और दशकों लंबे करियर में उन्होंने कई फिल्मों और टीवी सीरियलों में काम किया है। आज एक्टर्स के पास हर तरह की सुविधा और वैनिटी वैन तक है, पर राजेंद्र चावला के जमाने में एक्टर्स के पास न तो वैनिटी वैन थी और ना ही लंबा-चौड़ा स्टाफ। और तो और कपड़े तक एक्टर्स को खुले में बदलने पड़ते थे और घंटों काम करना पड़ता था। इस वक्त राजेंद्र चावला सीरीज ‘फ्रीडम एट मिडनाइट सीजन 2’ में नजर आ रहे हैं।
एक्टर्स की 8 घंटे की शिफ्ट की मांग पर बोले राजेंद्र चावला
‘बॉलीवुड बबल’ से बातचीत के दौरान राजेंद्र चावला से मौजूदा बहस और एक्टर्स द्वारा 8 घंटे की शिफ्ट की मांग के बारे में पूछा गया। इस पर उन्होंने कहा, ‘मेरा मानना है कि अगर आप इस इंडस्ट्री में आ रहे हैं, तो आपको पहले दिन से ही यह समझना होगा कि काम इसी तरह चलता है। आपको यह बात स्वीकार करनी होगी कि शिफ्ट 12-14 घंटे की होती हैं, क्योंकि काम का बोझ बहुत बढ़ गया है।’
‘ये स्वीकार नहीं तो कोई 9-5 वाली नौकरी करो, वहां खुश रहो’
उन्होंने आगे कहा, ‘उदाहरण के लिए, डेली सोप के लिए 22-25 मिनट का कंटेंट देना होता है। अब इन सबके बीच, अगर आप ये सब चोचले पालते रहेंगे कि मैं 8 घंटे काम करूंगा या 5 घंटे, तो काम कैसे पूरा होगा? अगर आप इस दौड़ में शामिल हो गए हैं, तो आपको इसके हिसाब से ही दौड़ना होगा। अगर आप इसे स्वीकार नहीं कर सकते, तो कोई 9 से 5 तक वाली नौकरी कर लीजिए और वहां खुश रहिए। किसी ने आपको यहां आने के लिए मजबूर नहीं किया है। थके-हारे सोना, निराश होकर सोने से बेहतर है।’
राजेंद्र चावला ने बताया उनके जमाने में क्या थे हालात और आज कितनी सुविधाएं
राजेंद्र चावला ने फिर आज के दौर के एक्टर्स की अपने दौर के एक्टरों से तुलना की और कहा कि मौजूदा दौर के कलाकार ज्यादा अच्छा कर रहे हैं और बेहतर स्थित में हैं। उन्होंने बताया कि जब करियर शुरू किया था तो कैसे-कैसे दिन देखने पड़े और अब कैसा हाल है। राजेंद्र चावला बोले, ‘अब एक्टर्स के लिए चीजें बहुत बेहतर हो गई हैं। अब सबके पास अपनी वैनिटी वैन और टीम है। हमारे जमाने में तो महिलाएं और हीरोइनें खुले में और पेड़ों के पीछे कपड़े बदलती थीं। एसी वाले मेकअप रूम या फर्श नहीं होते थे। अमिताभ बच्चन जैसे लोग धूप में अपनी पूरी कॉस्ट्यूम पहने बैठे रहते थे। आजकल लोग अगर उनका शॉट नहीं होता तो वैनिटी वैन में चले जाते हैं।’
‘हम कीड़ों से भरे कमरे में रहते, सोने की दरी दी जाती थी’
राजेंद्र चावला ने फिर उदाहरण देते हुए बताया, ‘एक बार जब मैं टीवी शो ‘सास बिना ससुराल’ पर काम कर रहा था, तब एक सुपरवाइजिंग प्रोड्यूसर मेरे पास आए। उन्होंने मुझसे कहा कि सर, हमें आपके बारे में कभी कोई शिकायत नहीं मिलती। आप कभी कुछ नहीं कहते। मैंने उनसे कहा कि मैं किस बात की शिकायत करूं? जब मैं थिएटर शो के लिए जाता था, तो हम कीड़ों से भरे कमरों में सोते थे। वो हमें सोने के लिए दरी देते थे। आप लोगों ने मुझे वैनिटी वैन, फल और एक चादर दी है, जिस पर मेरा नाम लिखा है, मैं किस बात की शिकायत करूं?’
8 घंटे काम की मांग पर यह बोली थीं दीपिका पादुकोण, 2 फिल्मों से निकलीं
मालूम हो कि 8 घंटे की शिफ्ट की मांग का मुद्दा तब शुरू हुआ, जब संदीप रेड्डी वांगा की फिल्म ‘स्पिरिट’ से दीपिका पादुकोण को निकाले जाने की खबरें आईं। कहा गया कि एक्ट्रेस ने मेकर्स से 8 घंटे की शिफ्ट मांगी थी और उन पर दबाव डाला था। बाद में दीपिका ने भी इस मुद्दे पर एक इंटरव्यू में रिएक्ट किया था। एक्ट्रेस ने कहा था कि बहुत सारे ऐसे मेल एक्टर्स हैं, जो रोजाना सिर्फ 8 घंटे ही काम करते हैं और वीकेंड पर बिल्कुल भी काम नहीं करते। दीपिका ने कहा था कि फिल्म इंडस्ट्री को अब बदलने का वक्त आ गया है। मालूम हो कि 8 घंटे की शिफ्ट की डिमांड के कारण दीपिका को ‘स्पिरिट’ के अलावा ‘कल्कि 2898 AD’ से भी बाहर होना पड़ा था।














