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  • 83 पैसे का रोबोट जिसे देखने के लिए चाहिए माइक्रोस्‍कोप, किस काम में आएगा इस्‍तेमाल? जानें

    World Smallest Autonomous Robot : भविष्‍य में रोबोट्स की अहम‍ियत को देखते हुए दुनियाभर में इनके विकास पर काम चल रहा है। इसमें कंपनियां और वैज्ञानिक दोनों जुटे हैं। पेन्सिलवेनिया यूनिवर्सिटी और मिश‍िगन यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने मिलकर दुनिया के सबसे छोटे ऑटोनॉमस रोबोटों को बनाया है। इन्‍हें देखने के लिए माइक्रोस्‍कोप की जरूरत पड़ती


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    By Azad Hind Desk जनवरी 10, 2026
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    World Smallest Autonomous Robot : भविष्‍य में रोबोट्स की अहम‍ियत को देखते हुए दुनियाभर में इनके विकास पर काम चल रहा है। इसमें कंपनियां और वैज्ञानिक दोनों जुटे हैं। पेन्सिलवेनिया यूनिवर्सिटी और मिश‍िगन यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने मिलकर दुनिया के सबसे छोटे ऑटोनॉमस रोबोटों को बनाया है। इन्‍हें देखने के लिए माइक्रोस्‍कोप की जरूरत पड़ती है। और आसान भाषा में समझना हो तो इनका आकार इंसान की कोशिकाओं के बराबर है। ये पानी में तैरने की काब‍िलियत रखते हैं। आसपास की चीजों को महसूस करते हैं और रिएक्‍ट यानी प्रतिक्र‍िया भी देते हैं। एक रोबोट की कीमत लगभग 1 अमेरिकी सेंट है, जो भारतीय मुद्रा में करीब 83 पैसे है। लेकिन इन रोबोट को बनाने की जरूरत क्‍यों पड़ी? जानते हैं।

    पहले प्रोग्रामेबल रोबोट

    वैज्ञानिकों की इस उपलब्‍ध‍ि के बारे में ‘साइंस रोबोटिक्स’ और ‘प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज (PNAS)’ में विस्‍तार से जानकारी दी गई है। इसके अनुसार, आकार में इतना छोटा होने के बावजूद ये रोबोट पारंपरिक रोबोट से ज्‍यादा स्‍वतंत्र हैं। ये पहले प्रोग्रामेबल रोबोट हैं जो अपने दम पर काम कर सकते हैं।

    महीनों तक कर सकते हैं काम

    इनके साइज पर मत जाइए, अपने काम में ये इतने माहिर हैं कि महीनों तक लगातार काम कर सकते हैं। ये और बात है कि इन्‍हें देखने के लिए माइक्रोस्‍कोप की जरूरत होती है। ये अपने आसपास के टेंपरेचर को महसूस करके अपनी द‍िशा बदल सकते हैं।

    किस काम आएंगे रोबोट

    रिपोर्ट के अनुसार, इन रोबोटों को कोशिकाओं की निगरानी करने और मेड‍िकल टेक्‍नोलॉजी के क्षेत्र में मदद के लिए तैयार किया गया है। भविष्‍य में अगर कोई छोटी डिवाइस बनाई जाती है, तो उसमें भी यह काम आ सकते हैं। खास बात है कि इतने छोटे रोबोटों में बारीक कंप्‍यूटरों को फ‍िट किया गया है।

    क्‍या कहना है वैज्ञानिकों का

    पहले बता दें कि यह एक रिसर्च है और ये रोबोट मार्केट में उपलब्‍ध होंगे या नहीं, अभी कन्‍फर्म नहीं है। रिसर्च पेपर काे ल‍िखने वाले मार्क मिस्‍कि‍न के अनुसार, उन्‍होंने 10 हजार गुना छोटे ऑटोनॉमस रोबोट बनाए हैं तो प्रोग्रामेबल रोबोटों की दुनिया में बिलकुल नई चीज है। उन्‍होंने कहा कि रोबोटिक्‍स का क्षेत्र पिछले करीब 40 साल से इस समस्‍या से जूझ रहा है कि छोटे रोबोट यानी 1 मिलीमीटर से कम साइज के रोबोट कैसे बनाए जाएं। यह र‍िसर्च उस दिशा में बड़ा कदम है।

    क्‍या-क्‍या लगा है रोबोट में

    इन रोबोट में सौर पैनल लगे हैं तो रोबोट्स को ऊर्जा देते हैं। खास बात है कि सौर पैनल इतने छोटे हैं कि सिर्फ 75 नैनोवॉट बिजली पैदा होती है। यह किसी स्‍मार्टवॉच में होने वाली बिजली की खपत से 1 लाख गुना कम है। इतनी कम पावर के साथ रोबोट में खास सर्किट लगे हैं तो बहुत कम वोल्‍टेज पर काम करते हैं। क्‍योंकि इन रोबोटों के ज्‍यादातर हिस्‍से में सौर पैनल लगे हैं। ऐसे में कंप्‍यूटिंग हार्डवेयर को लगाने में काफी मशक्‍कत हुई। यह रोबोट इसलिए अलग हैं क्‍योंकि इतने छोटे किसी भी रोबोट में अबतक प्रोसेसर, मेमोरी और सेंसर के साथ एक पूरे कंप्‍यूटर सिस्‍टम को शामिल नहीं किया गया है। यही वजह है कि ये रोबोट, ऑटोनॉमस हैं।

    भविष्‍य के लिए बड़ा कदम

    वैज्ञानिक अपनी रिसर्च को भविष्‍य के लिए बड़ा कदम बता रहे हैं। उनका कहना है कि इससे भविष्‍य में ऐसे रोबोटों को बनाने की राह आसान होगी जो ज्‍यादा एडवांस होंगे, छोटे होंगे और कठ‍िन हालात में काम कर पाएंगे। रिसर्च के जरिए वैज्ञानिकों ने यह भी दर्शाया है कि कैसे एक कंप्‍यूटिंग हार्डवेयर, सेंसर और मोटर को ऐसी चीज में फ‍िट कर दिया गया, जिसे आंखों से देखना नामुमकिन है। उसे देखने के लिए माइक्रोस्‍कोप चाहिए।

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