इस मिशन के फेल होने के बाद एक बार फिर से PSLV को लेकर चर्चा छिड़ गई है। यह कोई पहली बार नहीं है, जब PSLV के तीसरे चरण में कोई समस्या आई हो। इससे पहले मई 2025 में लॉन्च हुए पीएसएलवी-सी61 मिशन में भी तीसरे चरण में तकनीकी समस्या आई थी। उस मिशन का उद्देश्य ईओएस-09 उपग्रह को 505 किलोमीटर ऊंची कक्षा में स्थापित करना था, लेकिन वह पूरा नहीं हो सका। यह पहली बार है जब PSLV लगातार दो बार असफल हुआ है। इस मिशन का मुख्य सैटेलाइट DRDO का EOS-N1 (Anvesha) था, जिसे हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग पेलोड के साथ भारत की सैन्य क्षमता को अंतरिक्ष में बढ़ाना था।
तीसरे चरण में हुई गड़बड़ी
इसरो के अध्यक्ष वी. नारायणन ने बताया कि, तीसरे चरण तक रॉकेट ने पूरी तरह सही काम किया, लेकिन उसके बाद उड़ान में हल्का बदलाव आया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिकों की टीम सभी ग्राउंड स्टेशनों से मिले आंकड़ों का अध्ययन कर रही है। तीसरे चरण के अंत में रॉकेट के रास्ते में गड़बड़ी देखी गई, जिससे मिशन आगे नहीं बढ़ सका।
चार चरणों का रॉकेट होता है PSLV
इसरो प्रमुख ने बताया कि पीएसएलवी चार चरणों वाला रॉकेट होता है। इसका पहला चरण ठोस ईंधन का होता है, दूसरा तरल ईंधन का, तीसरा फिर ठोस ईंधन का और चौथा फिर तरल ईंधन का होता है। तीसरे चरण के अंत तक रॉकेट का प्रदर्शन अनुमान के अनुसार था। लेकिन तीसरे चरण के आखिर में रॉकेट में अचानक हलचल दिखी और उसका रास्ता बदल गया। इसी कारण मिशन सफल नहीं हो पाया। पूरी जांच के बाद ही आगे की जानकारी दी जाएगी।
इसरो के इस इस मिशन में नेपाल के लिए मुनल सैटेलाइट और स्टार्टअप OrbitAID का एक टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेटर भी था, जिसका उद्देश्य ऑन-ऑर्बिट रीफ्यूलिंग (अंतरिक्ष में ईंधन भरना) की तकनीक का परीक्षण करना था। इसके अलावा 13 अन्य पेलोड भी थे।
इस मिशन में शामिल AyulSAT को अंतरिक्ष में ईंधन भरने के लिए तैयार किया गया था, जो करीब 6 महीने बाद OrbitAID के चेजर उपग्रह के लिए एक लक्ष्य उपग्रह के रूप में कार्य करने वाला था। जो भारत को ऑन-ऑर्बिट रीफ्यूलिंग का परीक्षण करने के एक कदम और करीब ले जाता। वर्तमान में केवल चीन के पास ऑन-ऑर्बिट रीफ्यूलिंग की तकनीक है। OrbitAID के संस्थापक और सीईओ सकथिकुमार आर. ने सोमवार को टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि “हमें अब लक्ष्य और चेंजर दोनों उपग्रहों को एक साथ लॉन्च करने के लिए मजबूर होना पड़ा है। हमें उम्मीद है कि हम इस साल के अंत में ऐसा कर पाएंगे।’
यूके-ब्राजील समेत कई देशों के सैटेलाइट थे शामिल
इसरो के पीएसएलवी-सी62 मिशन के तहत इस रॉकेट में यूके, ब्राजील, थाईलैंड और स्पेन के सैटेलाइट भी थे। इसके अलावा, भारतीय स्टार्टअप्स द्वारा विकसित कई तकनीकों का प्रदर्शन करने वाले पेलोड भी थे। जिनमें ऑर्बिट में AI प्रोसेसिंग, स्टोर-एंड-फॉरवर्ड कम्युनिकेशन सिस्टम, विकिरण मापन, कृषि डेटा संग्रह और PS4 चरण के पुनरारंभ और डी-ऑर्बिट के बाद तैनात होने वाला एक री-एंट्री कैप्सूल शामिल था।
जनवरी 2025 से यह इसरो के लिए तीसरी लॉन्च विफलता है। इससे पहले GSLV-F15, जो NVS-02 नेविगेशन सैटेलाइट ले जा रहा था जो कि कक्षा में स्थापित होने से पहले नष्ट हो गया था।














