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  • 9 मार्च को ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर होगी वोटिंग, हंगामे पर रिजिजू ने विपक्ष को दी चेतावनी

    नई दिल्ली: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा पेश किए गए अविश्वास प्रस्ताव पर बहस और मतदान 9 मार्च को होगा। साथ ही 9 मार्च से शुरू होने वाला बजट सत्र का दूसरा चरण काफी खास होने वाला है, क्योंकि इस सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए जाएंगे। रविवार को केंद्रीय संसदीय


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    By Azad Hind Desk फरवरी 15, 2026
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    नई दिल्ली: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा पेश किए गए अविश्वास प्रस्ताव पर बहस और मतदान 9 मार्च को होगा। साथ ही 9 मार्च से शुरू होने वाला बजट सत्र का दूसरा चरण काफी खास होने वाला है, क्योंकि इस सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए जाएंगे। रविवार को केंद्रीय संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने यह जानकारी शेयर की।

    किरेन रिजिजू ने विपक्ष को चेतावनी देते हुए कहा कि, यदि विपक्ष ने बजट सत्र के पहले चरण की तरह विरोध जारी रखा तो यह उनके लिए ही नुकसानदायक होगा।

    रिजिजू की विपक्ष को चेतावनी

    रिजिजू ने बताया कि, ‘9 मार्च को लोकसभा में हम स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर बहस करेंगे। नियम के अनुसार, सत्र के पहले ही दिन इस अविश्वास प्रस्ताव पर निर्णय पहले ही दिन लिया जाएगा। बहस के बाद मतदान होगा।’ उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष सदन नहीं चलने देगा तो विशेषाधिकार का इस्तेमाल किया जाएगा, जिसका मतलब होगा कि बिना बहस के ही विधेयकों को पारित कर दिया जाएगा। यह विपक्ष के लिए एक बड़ा झटका होगा। उन्होंने यह भी कहा कि यदि विपक्ष बहस में भाग नहीं लेता है तो यह उनका अपना नुकसान होगा।

    छोटे दल सदन को बाधित करने के पक्ष में नहीं

    केंद्रीय संसदीय कार्यमंत्री ने विपक्ष की एकता में संभावित दरार का संकेत देते हुए कहा कि तृणमूल कांग्रेस ने स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। उन्होंने कहा, ‘अधिकांश छोटे दल सदन को बाधित करने के पक्ष में नहीं हैं। वे अपने मुद्दे उठाना चाहते हैं, खासकर विधानसभा चुनावों से पहले।’

    क्या है आरोप?

    विपक्षी दलों ने संविधान के अनुच्छेद 94(सी) के तहत लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस सौंपा था। विपक्षी दल लगातार आरोप लगा रहे हैं कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला सदन की कार्यवाही का संचालन निष्पक्ष तरीके से नहीं कर रहे हैं और सत्तापक्ष के पक्ष में झुकाव दिखा रहे हैं। हालांकि, लोकसभा में संख्या बल को देखते हुए इस अविश्वास प्रस्ताव को राजनीतिक तौर पर अधिकतर प्रतीकात्मक माना जा रहा है, क्योंकि इसके पारित होने की संभावना बेहद कम है।

    कांग्रेस के अनुसार, इस प्रस्ताव पर कुल 118 सांसदों के हस्ताक्षर हैं। कांग्रेस के साथ समाजवादी पार्टी और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (द्रमुक) समेत कई विपक्षी दलों ने इसका समर्थन किया है। हालांकि, तृणमूल कांग्रेस ने इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं।

    अब सभी की नजरें 9 मार्च पर टिकी हैं, जब बजट सत्र के दूसरे चरण के पहले दिन इस प्रस्ताव पर आगे की प्रक्रिया तय हो सकती है।

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