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  • 90 दिनों का कोटा रहेगा पूरा, ऊर्जा सुरक्षा के लिए ‘समुद्र मंथन’ करेगी सरकार, जानें क्या है प्लान

    नई दिल्ली: तेल के भंडार को लेकर सरकार अपना प्लान बदल रही है। ऊर्जा सुरक्षा के लिए सरकार अब ‘समुद्र मंथन’ करेगी। सरकार का प्लान है कि देश की ऊर्जा जरूरतों के लिए 90 दिनों तक का तेल भंडार रहे। इकनॉमिक टाइम्स के मुताबिक बदलते वैश्विक भू-राजनीतिक हालात और कच्चे तेल की आपूर्ति पर बढ़ते


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    By Azad Hind Desk फरवरी 27, 2026
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    नई दिल्ली: तेल के भंडार को लेकर सरकार अपना प्लान बदल रही है। ऊर्जा सुरक्षा के लिए सरकार अब ‘समुद्र मंथन’ करेगी। सरकार का प्लान है कि देश की ऊर्जा जरूरतों के लिए 90 दिनों तक का तेल भंडार रहे। इकनॉमिक टाइम्स के मुताबिक बदलते वैश्विक भू-राजनीतिक हालात और कच्चे तेल की आपूर्ति पर बढ़ते दबाव के बीच भारत सरकार ने तीन-स्तरीय रणनीति तैयार की है।

    सूत्रों के मुताबिक इस रणनीति में 6 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) अतिरिक्त रणनीतिक तेल भंडार बनाना, ‘समुद्र मंथन’ नाम से राष्ट्रीय गहरे समुद्र अन्वेषण मिशन शुरू करना और देश को ग्लोबल रिफाइनिंग व पेट्रोकेमिकल हब के रूप में विकसित करना शामिल है। इन प्रस्तावों को लागू करने के लिए कैबिनेट नोट तैयार किए जा रहे हैं और मई-जून तक मंजूरी मिलने का लक्ष्य है।
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    अभी कितना है देश में तेल भंडार?

    • वर्तमान में भारत के पास लगभग 5.33 MMT रणनीतिक कच्चा तेल भंडार है, जो करीब 10 दिनों के आयात के बराबर है।
    • इसके अलावा ओडिशा के चांदीखोल और कर्नाटक के पडुर में बन रहे वाणिज्यिक-सह-रणनीतिक भंडार (करीब 11.83 MMT, यानी 20-25 दिन) और रिफाइनरियों में मौजूद लगभग 55 दिन का स्टॉक मिलाकर कुल भंडारण क्षमता करीब 80 दिनों की है।

    क्या है सरकार का प्लान?

    • पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय 30 जून तक कैबिनेट से 6 MMT अतिरिक्त भंडार बनाने की मंजूरी मांग सकता है। लक्ष्य 90 दिन का रणनीतिक तेल भंडार तैयार करना है।
    • सभी मौजूदा और आगामी एलएनजी टर्मिनलों के लिए 10 दिन का रणनीतिक गैस भंडार बनाने की योजना भी एजेंडे में है।

    क्या है ‘समुद्र मंथन’?

    ऊर्जा सुरक्षा मिशन का दूसरा प्रमुख स्तंभ घरेलू हाइड्रोकार्बन उत्पादन बढ़ाना है। इसके लिए ‘समुद्र मंथन’ नाम से नेशनल डीप वाटर एक्सप्लोरेशन मिशन शुरू किया जाएगा।

    मिशन के तहत 2026-27 से अगले पांच वर्षों में अन्वेषण कुओं की संख्या 30 प्रति वर्ष से बढ़ाकर कम से कम 100 प्रति वर्ष की जाएगी। इनमें हर साल 25 कुएं गहरे समुद्र क्षेत्रों में और 40 स्ट्रैटिग्राफिक कुएं शामिल होंगे।

    एनर्जी को लेकर क्या है सरकार का लक्ष्य?

    • हाइड्रोकार्बन भंडार वृद्धि को वर्तमान 1.6 बिलियन टन ऑयल इक्विवेलेंट (BTOE) से बढ़ाकर 2035 तक 2 BTOE और 2047 तक 5 BTOE करना।
    • घरेलू कच्चा तेल उत्पादन को 29 MMT से बढ़ाकर 2030 तक 35 MMT और 2047 तक 100 MMT करना।
    • प्राकृतिक गैस उत्पादन को 36 BCM से बढ़ाकर 2030 तक 45 BCM और 2047 तक 100 BCM तक पहुंचाना।
    • ड्रिलिंग रिग, लॉगिंग टूल्स जैसे अन्वेषण उपकरणों के घरेलू निर्माण को बढ़ावा देने के लिए 30 जून तक विशेष योजना शुरू की जाएगी।

    रिफाइनिंग पर भी सरकार का फोकस

    सरकार का तीसरा फोकस भारत को ग्लोबल रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल हब बनाना है। लक्ष्य साल 2047 तक रिफाइनिंग क्षमता को 400 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MMTPA) तक बढ़ाना है, जिसमें पेट्रोकेमिकल्स का मजबूत एकीकरण होगा।

    सूत्रों के अनुसार, ‘पेट्रो-केमिकल्स’ विषय को पेट्रोलियम मंत्रालय के तहत लाने के लिए ‘Allocation of Business Rules, 1961’ में संशोधन पर विचार किया जा रहा है, ताकि नीतिगत समन्वय बेहतर हो सके। सरकार तेल एवं गैस क्षेत्र की सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs) के विलय पर भी विचार कर रही है, ताकि बड़े वैश्विक ऊर्जा दिग्गज तैयार किए जा सकें।

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