नीपज चोपड़ा ने कही ये बात
नीरज चोपड़ा ने बताया कि बचपन से जिस खिलाड़ी को वे अपना आदर्श मानते थे, उनके साथ काम करना एक बहुत ही खास अनुभव रहा। उन्होंने कहा कि जेलेज्नी की कोचिंग से उन्हें जैवलिन थ्रो को लेकर एक नई समझ मिली। इसमें ट्रेनिंग के नए तरीके और तकनीकी इनपुट शामिल थे। नीरज ने कहा, ‘जैन के साथ काम करने से मेरी आंखें कई नए विचारों के लिए खुल गईं। जिस तरह से वे तकनीक, लय और मूवमेंट के बारे में सोचते हैं, वह अविश्वसनीय है। हमने साथ में जितने भी सेशन किए, मैंने उनसे बहुत कुछ सीखा।’ उन्होंने आगे कहा, ‘जिस बात पर मुझे सबसे ज्यादा गर्व है, वह है उस व्यक्ति के साथ बनी दोस्ती, जो जीवन भर मेरा आदर्श रहा है। जैन न केवल जैवलिन थ्रो के इतिहास के सबसे महान खिलाड़ी हैं, बल्कि मैं जिन बेहतरीन इंसानों से मिला हूं, उनमें से एक हैं।’
जेलेज्नी ने भी नीरज के साथ बिताए समय और हासिल की गई प्रगति पर बात की। उन्होंने कहा, ‘नीरज जैसे एथलीट के साथ काम करना एक शानदार अनुभव था। मुझे खुशी है कि हम मिले और साथ काम कर सके, और मैंने उन्हें पहली बार 90 मीटर की बाधा तोड़ने में मदद की। विश्व चैंपियनशिप को छोड़कर, वे हर बार कम से कम दूसरे स्थान पर रहे और यह कोई बुरा रिकॉर्ड नहीं है। दुर्भाग्य से, टोक्यो से 12 दिन पहले लगी पीठ की चोट ने उनके अवसरों को काफी प्रभावित किया।’ 59 साल के जेलेज्नी ने कहा कि नीरज के पास आगे बढ़ने के मजबूत आसार हैं। उन्होंने कहा, ‘हमारा रिश्ता मानवीय स्तर पर भी बहुत सकारात्मक है और हम संपर्क में रहेंगे। हम निश्चित रूप से किसी ट्रेनिंग कैंप में या, उदाहरण के लिए, यूरोप या भारत में अपने परिवारों के साथ छुट्टियों पर मिलेंगे।’
नीरज चोपड़ा ने बताया आगे का प्लान
नीरज चोपड़ा ने बताया कि अब वे आने वाले सीजन के लिए अपने ट्रेनिंग प्लान्स पर ज्यादा नियंत्रण रखने की योजना बना रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘मैं 2026 में आने वाली चीजों का इंतजार कर रहा हूं। मैंने नवंबर की शुरुआत में अपनी तैयारी शुरू कर दी है। हमेशा की तरह, लक्ष्य स्वस्थ रहना है और मैं जल्द ही फिर से प्रतिस्पर्धा करने के लिए उत्साहित हूं।’ उन्होंने आगे कहा, ‘साथ ही, मैं विशेष रूप से 2027 में होने वाली विश्व चैंपियनशिप वाले साल का इंतजार कर रहा हूं और उससे भी बड़ा लक्ष्य 2028 के ओलंपिक खेल हैं।’ पिछले साल दोहा डायमंड लीग में अपना 90 मीटर का थ्रो रिकॉर्ड करने के बाद, नीरज चोपड़ा विश्व चैंपियनशिप में आठवें स्थान पर रहे थे।













