ईटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक रेलवे के सीनियर अधिकारियों ने बताया कि वे जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (JICA) या अन्य मल्टीलेटरल फाइनेंस इंस्टीट्यूशन से अतिरक्त लोन लेने पर विचार नहीं कर रहे हैं। एक अधिकारी ने कहा कि मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर के लिए और एक्सटरनल फंडिंग की जरूरत नहीं होगी। इसके लिए ग्रॉस बजटरी सपोर्ट का यूज किया जाएगा।
अब जापान से नहीं मंगानी पड़ेगी हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन! जानिए क्या है रेलवे का प्लान
क्या है प्लान?
अगले साल के बजट में नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन के लिए 15,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं जो पिछले साल के 15,500 करोड़ रुपये से कम है। रेलवे फाइनेंस मिनिस्ट्री से अतिरिक्त फंड लेने की योजना बना रहा है। जीका ने इस प्रोजेक्ट के लिए साल 2017 से 59,396 करोड़ रुपये का सॉफ्ट लोन दिया है।
- मुंबई और अहमदाबाद के बीच बन रहा पहला बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट
- इसकी ओरिजिनल कॉस्ट करीब 1.08 लाख करोड़ रुपये थी
- लेकिन भूमि अधिग्रहण में देरी के कारण इसमें 83% उछाल
- जापान के सहयोग और फंडिंग से बन रहा है यह प्रोजेक्ट
- 100 किमी स्ट्रैच पर अगले साल ट्रेन चलाने का है लक्ष्य
इस प्रोजेक्ट को जापान सरकार के सहयोग और फंडिंग से बनाया जा रहा है। इसमें 12 स्टेशन बनाए जाने हैं जिनमें से 8 का फाउंडेशन का काम पूरा हो चुका है। सरकार का दावा है कि 2027 तक इसमें 100 किमी का स्ट्रेच शुरू हो जाएगा।
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7 नए कॉरिडोर
सरकार ने हाल में पेश बजट में सात नए बुलेट ट्रेन कॉरिडोर की भी घोषणा की है। इन की कुल लंबाई करीब 4,000 किमी है और इन पर 16 लाख रुपये का निवेश होने की संभावना है। इनमें मुंबई-पुणे, पुणे-अहमदाबाद, हैदराबाद-बेंगलुरु, हैदराबाद-चेन्नई, चेन्नई-बेंगलुरु, दिल्ली-वाराणसी और वाराणसी-सिलिगुड़ी कॉरिडोर शामिल हैं।










