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  • India GDP and BRICS: भारत की गोद में जा बैठे रूस-चीन, चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था से क्या अमेरिका होगा दूर

    नई दिल्ली: नया साल यानी 2026 भारत के लिए बड़ी कामयाबी लेकर आया है। एक तो भारत जापान को पछाड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश बन गया है। दूसरा-भारत को 1 जनवरी, 2026 से ब्रिक्स की अध्यक्षता मिल गई है। ब्रिक्स में रूस-चीन भी हैं, जो जाने-अनजाने भारत के करीब आ चुके


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    By Azad Hind Desk जनवरी 1, 2026
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    नई दिल्ली: नया साल यानी 2026 भारत के लिए बड़ी कामयाबी लेकर आया है। एक तो भारत जापान को पछाड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश बन गया है। दूसरा-भारत को 1 जनवरी, 2026 से ब्रिक्स की अध्यक्षता मिल गई है। ब्रिक्स में रूस-चीन भी हैं, जो जाने-अनजाने भारत के करीब आ चुके हैं। वहीं, बीते साल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कड़े टैरिफ लगाने की वजह से भारत कहीं दूर चला गया है। अब नए साल में देखना यह होगा कि क्या भारत अमेरिका से दूर होगा या ट्रंप करीब लाने की कोशिश करेंगे।

    ब्रिक्स की अध्यक्षता के साथ शुरू होगी नई भूमिका

    भारत ब्रिक्स की अध्यक्षता के साथ एक नई भूमिका की शुरुआत होगी। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इथियोपिया-ओमान और जॉर्डन जैसे देशों की यात्रा पर भी गए थे। वह इन देशों के साथ रिश्ते बढ़ा रहे हैं, ताकि भारत क्षेत्र में ताकतवर देश बनकर उभर सके। नवभारत टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, कच्चे तेल का उत्पादन, सोने के भंडार, आर्थिक आकार और खाद्य आत्मनिर्भरता भू-राजनीति में सौदेबाजी की शक्ति निर्धारित करते हैं। 11 ब्रिक्स देशों का इनमें से एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह समूह नियमित रूप से डॉलर के प्रभुत्व को चुनौती देता रहा है। विश्व ऊर्जा सांख्यिकी समीक्षा 2025 के अनुसार, ब्रिक्स देशों ने मिलकर 2024 में विश्व के लगभग 42 प्रतिशत तेल का उत्पादन किया।

    भारत तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगा

    भारत ने सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के मामले में विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का दर्जा हासिल कर लिया है। इस मामले में भारत ने जापान को पीछे छोड़ दिया है। अब दुनिया की पांच बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में पहले नंबर पर अमेरिका, दूसरे पर चीन, तीसरे पर जर्मनी, चौथे पर भारत और पांचवें नंबर पर जापान आ गया है। यह जानकारी सरकार की वार्षिक आर्थिक समीक्षा में सामने आई है। इतना ही नहीं, आने वाले वर्षों में भारतीय अर्थव्यवस्था जर्मनी को पीछे छोड़ देगी और अमेरिका और चीन के बाद तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है।

    चीन और रूस के पास दुनिया का 14 फीसदी सोना

    चीन और रूस मिलकर केंद्रीय बैंकों के पास मौजूद वैश्विक स्वर्ण भंडार का 14 प्रतिशत से अधिक हिस्सा रखते हैं। विश्व स्वर्ण परिषद के अनुसार, ब्रिक्स देशों के पास कुल मिलाकर लगभग 20 प्रतिशत स्वर्ण भंडार है। यदि घरेलू स्वर्ण भंडार को भी शामिल किया जाए, तो भारत का हिस्सा कई देशों से आगे निकल जाएगा।

    ब्रिक्स देशों की GDP दुनिया की 29 फीसदी

    विश्व बैंक के अनुसार, 2024 में चीन, भारत, ब्राजील और रूस दुनिया की 11 सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल थे। ब्रिक्स देशों का 2024 में वैश्विक जीडीपी में लगभग 29 प्रतिशत का योगदान था। सदस्य देशों के विकास और नए देशों के जुड़ने के कारण पिछले कुछ वर्षों में ब्रिक्स अर्थव्यवस्था का आकार तेजी से बढ़ा है। ऐसे में भारत इस साल ब्रिक्स पर ज्यादा फोकस कर सकता है।

    भारत ने ब्रिक्स देशों को दे दी ये मंजूरी

    भारत ने बीते साल अगस्त में बड़ा खेल करते हुए अमेरिकी डॉलर (USD) के प्रभुत्व को चुनौती देने की दिशा में एक सर्कुलर जारी किया है, जिसके तहत ब्रिक्स देशों को अपना 100% व्यापार भारतीय रुपये में करने की मंजूरी मिल गई। द डेली होडल की एक रिपोर्ट के अनुसार, विश्लेषकों का मानना है कि इस कदम से वैश्विक बाजारों में डॉलर के वर्चस्व में गिरावट की गति तेज हो सकती है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों को बिना पूर्व अनुमति के अधिक वोस्त्रो खाते खोलने का निर्देश दिया, जिससे अन्य देशों के निर्यातक और आयातक अब समर्पित वोस्त्रो खातों के माध्यम से रुपये में अपना कारोबार कर सकते हैं।

    रूस-चीन-भारत वैकल्पिक भुगतान प्रणाली के पक्ष में

    ब्रिक्स देशों द्वारा अमेरिकी डॉलर से स्वतंत्र एक वैकल्पिक भुगतान प्रणाली बनाने का प्रयास गति पकड़ रहा है, जिससे अमेरिकी वित्तीय प्रभुत्व के लिए संभावित चुनौती को लेकर वाशिंगटन में नई चिंताएं पैदा हो रही हैं। रूस में ब्राजील के राजदूत सर्जियो रोड्रिग्स डॉस सैंटोस ने रूस की सरकारी समाचार एजेंसी तास को बताया कि ब्रिक्स भुगतान तंत्र का निर्माण यथार्थवादी और प्राप्त करने योग्य दोनों है। और इसे ब्लॉक की सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक प्राथमिकताओं में से एक बताया। उन्होंने कहा कि रूस की 2024 की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान इसकी नींव रखी गई थी और इस वर्ष ब्राजील के नेतृत्व में चर्चा जारी है।

    रूस से कच्चे तेल के आयात में स्थिरता

    टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा रूसी तेल कंपनियों पर लगाए गए प्रतिबंधों का भारतीय रिफाइनरों पर कोई खास असर नहीं पड़ा है और वे रूस से गैर-प्रतिबंधित कच्चे तेल की खरीद जारी रखे हुए हैं। ट्रंप द्वारा रूसी कंपनियों लुकोइल और रोसनेफ्ट पर प्रतिबंध लागू होने के कुछ हफ्ते बाद भी दिसंबर में रूस से भारत के कच्चे तेल के आयात में स्थिरता देखी जा रही है। पश्चिमी प्रतिबंधों के दबाव के बावजूद द्विपक्षीय संबंध मजबूत बने हुए हैं।

    भारत ने रूस से तेल आयात करने का निकाला तोड़

    रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में व्यापार और रिफाइनिंग सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि इस दिसंबर में भारत का रूसी तेल आयात प्रतिदिन 10 लाख बैरल से अधिक होने की उम्मीद है। यह आयात में भारी कमी की उम्मीदों के विपरीत है, क्योंकि रिफाइनर अभी भी उन गैर-प्रतिबंधित कंपनियों से तेल खरीद रहे हैं जो भारी छूट प्रदान करती हैं।

    भारत दुनिया का तीसरा क्रूड ऑयल इंपोर्टर

    रिपोर्ट में आंकड़ों से पता चलता है कि भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक है। भारत ने नवंबर में रूस से 1.77 मिलियन बैरल प्रति दिन तेल प्राप्त किया, जो अक्टूबर की तुलना में 3.4% की वृद्धि दर्शाता है। वहीं, दो प्रमुख रूसी उत्पादकों पर ट्रंप द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के कारण महत्वपूर्ण गिरावट की आशंकाओं के बावजूद LSEG के प्रारंभिक व्यापार प्रवाह आंकड़ों के आधार पर दिसंबर में आपूर्ति 1.2 मिलियन बैरल प्रति दिन से अधिक होने का अनुमान है।

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