बीबीसी के मुताबिक, पिछले साल के आखिर में घोषित टैक्स सिस्टम में बड़े बदलाव से कई छूटें खत्म हो गई हैं, जो 1994 से लागू थीं। उस समय चीन एक-बच्चे के नियम को लागू कर रहा था। चीनी सरकार ने शादी से जुड़ी सेवाओं और बुजुर्गों की देखभाल को वैल्यू एडेड टैक्स (VAT) से छूट दी है। पेरेंटल लीव बढ़ाने और बच्चे के जन्म पर कैश देने का भी फैसला लिया गया है।
चीन के सामने बड़ा संकट
बुजुर्ग आबादी के संकट का सामना कर रहा बीजिंग ज्यादा से ज्यादा युवा चीनी लोगों को शादी करने और जोड़ों को बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित करने की कड़ी कोशिश कर रहा है। आंकड़ों से पता चलता है कि चीन की आबादी तीन सालों से घट रही है। चीन में साल 2024 में सिर्फ 96 लाख बच्चे पैदा हुए।
चीन की कोशिशों में कंडोम, गर्भनिरोधक गोलियों और गर्भनिरोधक पर टैक्स बढ़ाना भी है। इस पर लोगों की प्रतिक्रिया अलग तरह की है। लोगों का कहना है कि बच्चे पैदा करने से रोकने के लिए कंडोम महंगे करने से ज्यादा से कुछ चाहिए। एक यूजर ने लिखा कि लोग कंडोम की कीमत और बच्चे पालने की कीमत के बीच का अंतर समझ सकते हैं।
फैसले पर एक्सपर्ट बंटे
बीजिंग में पॉपुलेशन रिसर्च इंस्टीट्यूट की 2024 की एक रिपोर्ट के अनुसार, चीन बच्चे पालने के लिए सबसे महंगे देशों में से एक है। प्रतिस्पर्धी शैक्षणिक माहौल में स्कूल फीस और महिलाओं के लिए काम और पेरेंटिंग के बीच तालमेल बिठाने की चुनौती के कारण लागत बढ़ जाती है। इससे युवा बच्चे पैदा करने से बचते हैं।
टैक्स में बदलाव पर ऑब्जर्वर बंटे हुए हैं। विस्कॉन्सिन-मैडिसन यूनिवर्सिटी के डेमोग्राफर यी फुक्सियन कहते हैं कि यह सोचना कि कंडोम पर टैक्स बढ़ाने से जन्म दर पर असर पड़ेगा, गलत है। सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज की हेनरीएटा लेविन ने कहा कि कंडोम पर टैक्स लगाने का कदम प्रतीकात्मक है। यह चीन की फर्टिलिटी दर को बढ़ाने के लिए लोगों को प्रोत्साहित करने की बीजिंग की कोशिशों को दिखाता है।
क्या है बाधा
लेविन आगे कहती हैं कि चीन की कोशिशों में एक बाधा यह है कि बहुत सारी पॉलिसी और सब्सिडी कर्ज में डूबी प्रांतीय सरकारों को लागू करनी होंगी। यह साफ नहीं है कि वे पर्याप्त संसाधन दे पाएंगी। ये भी हो सकता है कि बच्चों के लिए लोगों को प्रोत्साहित करने का दांव उल्टा पड़ जाए। लोगों को लग सकता है कि सरकार एक बहुत निजी मामले में दखलअंदाजी कर रही है।













