एक और फर्जीवाड़े की पोल खुली
हाल ही में जनरल असीम मुनीर खुद कबूल चुका है कि अल्लाह ने ही पाकिस्तान को बचा लिया। हाल ही में पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी भी कह चुके हैं कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उनलोगों को तो बंकर में छिपने की नौबत आ गई थी। लेकिन, पाकिस्तानी जनता के बीच माहौल बनाए रखने के लिए कुछ सोशल मीडिया हैंडल पिछले कुछ दिनों से फिर से भारत को नीचा दिखाने के लिए हमारे सैन्य ठिकानों पर हमले और तबाही की फर्जी तस्वीरें फैलाने में जुटे हुए हैं। लेकिन, बहुत जल्द ही इस फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हो गया है।
तस्वीरों के विश्लेषण से पोल खुली
पाकिस्तानियों की ओर से सोशल मीडिया पर जो भारतीय सैन्य ठिकानों पर नुकसान के दावे वाली तस्वीरें साझा की जा रही हैं, उनके विश्लेषण से पता चला है कि वह तस्वीरें पूरी तरह से फर्जी हैं। ओपन सोर्स इंटेलिजेंस से जुड़े एक एनालिस्ट डेमियन साइमन ने सैटेलाइट इमेज के सहारे पाकिस्तानियों में फैलाई झूठ की पोल खोल दी है।
अमृतसर सैन्य ठिकाने को लेकर झूठ
दरअसल, पाकिस्तान की ओर से समय-समय पर फेक न्यूज फैलाने का एक पैटर्न बन गया है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तो पाकिस्तानी मीडिया से लेकर वहां की सरकारी सोशल मीडिया हैंडलों के माध्यम से भी भारत के खिलाफ हमलों के बारे में झूठी कहानियां और तस्वीरें फैलाने का अभियान चला हुआ था। इन्हीं में यह दावा भी था कि अमृतसर स्थित सैन्य ठिकाना भी पाकिस्तानी सेना का निशाना बन गया है।
ऑपरेशन सिंदूर के समय भी चलाई मुहिम
तब भी भारत की ओर से पाकिस्तान के बे-सिर पैर के दावों को खारिज किया गया था और पीआईबी की फैक्ट चेक यूनिट ने स्पष्ट किया था कि पाकिस्तानी हैंडल से जो अमृतसर मिलिट्री बेस के नाम पर जो वीडियो शेयर किया जा रहा है, वह दरअसल 2024 में जंगल में लगी एक आग का है। पीटीआई ने आगाह किया था कि सही सूचना के लिए सिर्फ आधिकारिक सोर्स से जारी की गई जानकारी पर ही भरोसा करें।













