3 तरह के बदलाव का प्रस्ताव
संघ के सांगठनिक ढांचे में तीन तरह के बदलाव का प्रस्ताव है। अभी संघ ने पूरे देश को काम के लिहाज से 11 क्षेत्रों में बांटा है, लेकिन इसे 9 करने का प्रस्ताव है। अभी संघ के प्रांत प्रचारक राज्य की सरकारी परिभाषा के हिसाब से बने प्रांत के आधार पर नहीं होते हैं, ये भी संघ के कामकाज की सुविधा के हिसाब से बनाए गए हैं। अब प्रांत प्रचारकों की जगह राज्य प्रचारक बनाने का प्रस्ताव है। ये राज्य की इकाई के हिसाब से ही होंगे।
बड़े राज्यों में कई प्रांत प्रचारक
जैसे अभी संघ के हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड जैसे राज्यों में एक ही प्रांत प्रचारक है, जो एक तरह से पूरे राज्य के ही प्रचारक है। जो बड़े राज्य हैं, उनमें कई प्रांत प्रचारक है। जैसे राजस्थान में 3 और यूपी में 6 प्रांत प्रचारक हैं। बदलाव के बाद सभी राज्यों में राज्य प्रचारक होंगे। अभी बड़े राज्यों में कामकाज के हिसाब से ज्यादा प्रांत प्रचारक बनाए गए हैं। राज्य प्रचारक के साथ संभाग प्रचारक का पद भी बनाया जाएगा। ये एक संभाग यानी कमिश्नरी के प्रचारक होंगे। ये विभाग प्रचारक और राज्य प्रचारक के बीच की इकाई होंगे।
काम के विस्तार के कारण संगठन में होगी बदलाव की बात
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े सूत्रों ने बताया कि संघ के काम का विस्तार हो रहा है। उसी हिसाब से संगठन का ढांचा बनाने का प्रस्ताव है। इससे काम का विकेंद्रीकरण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि संघ ने समाज जागरण सहित पंच परिवर्तन का जो काम तय किया है, उसे ठीक से संचालित करने के लिए संगठन के ढांचे में बदलाव की जरूरत महसूस की जा रही है। अक्टूबर 2026 तक संघ के शताब्दी वर्ष के ही कई कार्यक्रम है, इसलिए अगर बदलाव के प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तब भी ये साल 2027 तक ही लागू हो पाएगा।













